बंगाल चुनावों में भारी हिंसा, विपक्ष ने साधा चुनाव आयोग पर निशाना

आईएनएन भारत डेस्क
बंगाल पंचायत चुनावों में हुई भारी हिंसा में 13 लोगों की जान चली गयी और बड़ी संख्या में लोग जख्मी भी हुए। विपक्षी दलों विशेषकर माकपा और कांग्रेस ने इस हिंसा के लिए राज्य चुनाव आयुक्त ए के सिंह को जिम्मेदार ठहराया और इन चुनावों को रद्द करने की मांग की।

कई जगह बमबारी और हिंसा में शाम 6 बजे तक 13 मौतों की सूचना थी। विपक्ष ने सीधे चुनाव आयुक्त ए के सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि चुनाव आयुक्त ने तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी की इच्छा के अनुसार चुनाव एक ही चरण में नही कराया होता तो इस भयावह हिंसा से बचा जा सकता था। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग को चेताया कि कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहे और मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार को भी इस हिंसा का जवाब देना पड़ेगा।

पंचायत चुनावों के नामांकन के पहले दिन से लेकर अभी तक कुल 30 आदमी इस हिंसा में मारे जा चुके हैं। ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने इसे लोकतंत्र को तबाह करने वाली तृणमूल कांग्रेस की परियोजना का हिस्सा बताया।
पुलिस कार्रवाई को भी दिखावटी बताते हुए विपक्ष ने इसे राज्य सरकार के इशारे और शह पर किया गया कृत्य बताया। ध्यान रहे पहले चुनाव आयुक्त ए के सिंह ने तीन चरणों में चुनाव की अधिसूचना जारी की थी। 31 अप्रैल को जारी इस हिंसा में ए के सिंह ने 1, 3 और 5 मई को चुनाव की घोषणा की थी। परंतु ममता बनर्जी के दखल के बाद ए के सिंह ने दूसरी अधिसूचना जारी करके एक चरण में चुनाव करवाने की घोषणा कर डाली। अब चुनाव आयुक्त ए के सिंह विपक्ष के निशाने पर हैं।

चुनावों के दौरान विभिन्न गुटों में हुए क्लेश की खबरें 24 दक्षिण परगना, पश्चिमी मिदनापुर और कूच बिहार जिलों से सबसे अधिक आ रही हैं। 24 दक्षिणी परगना में जमीं, जीविका, बबस्तुतंत्र और परिबेश रक्षा कमेटी के लोगों ने आरोप लगाया कि तृणमूल के हथियारबंद लोगों ने उनके पंचायत उम्मीदवार शरीफुल मलिक का अपहरण कर लिया और आतंक फैलाने का प्रयास किया।
उतरी दिनाजपुर में तीन क्रूड बम गलासुरा पोलिंग बूथ के पास बरामद किये गये। दो बम रेलवे लाइन के पास बरामद हुए। इन चुनावों के लिए कथित रूप से 71,500 पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे।