योगी के ‘‘भगवा जंगलराज‘‘ में भीम आर्मी जिलाध्यक्ष के भाई सचिन वालिया की गोली मारकर हत्या

आईएनएन भारत डेस्क
लगता है कि योगी की ठाकुरशाही ने फिर मनाया दलितों पर हमले का एक साल। याद रहे पिछले साल इसी दिन पुलिस पर हमले और हिंसा के नाम पर भीम आर्मी के नेता चन्द्रशेखर और अन्यों पर मुकदमें लादकर उन्हें जेल में डाल दिया गया था और आज फिर से भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष के भाई सचिन वालिया की हत्या करके शायद उन्होंने अपनी विजय का सालाना जश्न इस तरह से मनाया है। यह कोई इत्तेफाक नही हो सकता है कि पूरे एक साल होने के मौके पर भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष के भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।

यह इत्तेफाक इसलिए भी नही है कि जिला प्रशासन ने पहले महाराणा प्रताप जयंती जैसे किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी लेकिन मंगलवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में डीएम ने सिर्फ 150 लोगों को कार्यक्रम करने की अनुमति दे डाली। यह अनुमति रद्द किये जाने के बाद अचानक से अनुमति दिया जाना एक पहले से लिखी जा चुकी पटकथा का नतीजा है। यह इत्तेफाक अथवा अचानक हुआ घटनाक्रम इसलिए भी नही है कि एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर भारी पुलिस बल मौजूद था। ऐसे में इस तरह की घटना का वहां पर होना संभव नहीं है और हत्याकाण्ड़ हो गया।

पूरे घटनाक्रम से साफ जाहिर हो रहा है कि यह एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया काम है और जिस प्रकार पुलिस अब लीपा पोती में जुट गई है। वह भी इसके पीछे उपरी दबाव और बड़ी साजिश की तरफ इशारा कर रहा है। पिछले साल भी राणा प्रताप जयंती मनाने के नाम पर दलितों के घरों पर हमला किया गया था वहां आगजनी की गई थी और सजा भी उन्हीं पीड़ित दलितों के शिक्षित और जुझारू बच्चों को भुगतनी पड़ी थी। भीम आर्मी के मुखिया चन्द्रशेखर रावण को हिंसा का मास्टरमाइंड मानते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था। रावण आज भी रासुका के तहत जेल में बंद है और दलितों के घर फूंकने वाले फिर से दलित नौजवान की हत्या करके अपनी जीत का सालाना जश्न माना रहे लगते हैं।

रामनगर गांव दलित बहुल है और यहां पर राजपूत समाज द्वारा महाराणा प्रताप भवन बनवाया गया है। राजपूत समाज द्वारा पिछले कुछ दिनों से यहां नौ मई को महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही थी और लगता है कि इस वारदात को अंजाम देना भी उन्हीं तैयारियों का हिस्सा था। जिला प्रशासन ने पहले किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी लेकिन मंगलवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में डीएम ने सिर्फ 150 लोगों को कार्यक्रम करने की अनुमति दे डाली और जिसका नतीजा इस काण्ड़ की शक्ल में सामने आया है।

जिस काण्ड़ में भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के छोटे भाई सचिन वालिया की उनके गांव रामनगर में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई जब वह अपने घर लौट रहे थे। बताया जाता है कि गांव में स्थित महाराणा प्रताप भवन में महाराणा प्रताप जयन्ती कार्यक्रम में आए युवकों ने सचिन की गोली मारकर हत्या की है।

  1. घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। पूरे जिले में माहौल तनावपूर्ण हो गया है। जिला अस्पताल में सचिन के परिजन और भीम आर्मी से जुड़े लोग आक्रोशित और गुस्से में हैं सचिन की डेड बॉडी अस्पताल मोर्चरी में रखी हुई है। परिजन शव के पोस्टमार्टम न कराने पर अड़े हुए हैं।

पुलिस इस पूरे मामले को संदिग्ध मान रही है। एहतियात के चलते पूरे जनपद में इंटरनेट सेवाएं अनिश्चितकालीन रूप से बंद कर दी गई है।