महाभियोग मामले में कांग्रेस ने याचिका वापस ली, रातों रात बेंच बनाये जाने पर सिब्बल ने उठाये सवाल

आईएनएन भारत डेस्क
नई दिल्लीः प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज करने के राज्यसभा के सभापति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका कांग्रेस के सांसदों की तरफ से उनके वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली।

याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के गठन पर सवाल उठाए। कपिल सिब्बल ने पांच जजों की पीठ के गठन पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिका को अभी नंबर भी नहीं मिला है। वह अभी स्वीकार नहीं हुई है, लेकिन रातों रात ये पीठ किसने बनाई है।

कपिल को पीठ के गठन के बारे में रात के 10 बजे सूचना मिली। जिस कारण से कपिल सिब्बल ने संवैधानिक पीठ के गठन से जुड़े प्रशासनिक ऑर्डर की कॉपी दिखाने की मांग कर डाली।

इसके बाद जस्टिस सीकरी की अगुवाई में गठित पीठ ने कहा कि उनके पास प्रशासनिक आदेश वाली कॉपी नहीं है। पांच जजों की पीठ ने दलील दी कि मामले की सुनवाई मेरिट पर होनी चाहिए। हालांकि यह एकदम आश्चर्यजनक था कि जिस आदेश से पीठ का गठन हुआ उसी आदेश की काॅपी पीठ के पास नही थी।

कपिल सिब्बल ने सवाल किया कि मामले की सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की पीठ गठित करने का आदेश किसने दिया? सिब्बल ने कहा, ‘मामला प्रशासनिक आदेश के जरिये पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया, प्रधान न्यायाधीश इस संबंध में आदेश नहीं दे सकते हैं। कपिल सिब्बल का कहना था कि चीफ जस्टिस इस मामले में प्रशासनिक या न्यायिक स्तर पर कोई आदेश जारी नहीं कर सकते। तभी मामले को संविधान पीठ को रेफर किया जाता है, पर जब कानून का कोई सवाल उठा हो, यहां फिलहाल कानून का कोई सवाल नहीं है।

उन्होंने कहा कि ये सिर्फ न्यायिक आदेश के जरिये ही संविधान पीठ को भेजा जा सकता है, प्रशासनिक आदेश के जरिये नहीं। हमें वो आदेश चाहिए कि किसने इस याचिका को पांच जजों की पीठ के पास भेजा। हम आदेश मिलने के बाद इसे चुनौती देने पर विचार करेंगे।

ध्यान रहे कि इस मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस चेलामेश्वर और जस्टिस कौल की पीठ ने कपिल सिब्बल को सुनने के बाद उन्हें मंगलवार को आने को कहा था। कपिल सिब्बल ने जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस एसके कौल की पीठ से तत्काल सुनवाई के लिए यचिका को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। परंतु उससे पहले ही अचानक रात को 10 बजे कपिल सिब्बल को इस पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ के गठन की जानकारी मिली । और पीठ इस पीठ को गठन करने वाले आर्डर की काॅपी भी यचिकाकर्ताओं के वकील से शेयर करना नही चाहती है।

इस पीठ के गठन में एक अनौखी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम जजों की वरिष्ठता को नजर अंदाज करके वरिष्ठता के आधार पर छठे नंबर से शुरू जजों को लेकर इस पीठ का रातों रात गठन कर दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि यह बहुत निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि संवैधानिक पीठ ने प्रशासनिक ऑर्डर की कॉपी शेयर करने तक से इनकार कर दिया।

हालांकि यह पहली बार नही है कि सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ जजों को नजर अंदाज करके और जब एक वरिष्ठतम जज ने मामले को सुनने पर हामी भरी हो और अचानक इस प्रकार से पीठ गठन करके उक्त जज से मामले की सुनवाई छीनी गई हो। इससे पहले नवंबर में मास्टर आॅफ रोस्टर के मामले में भी ठीक ऐसे ही हुआ था। इसके अलावा जज लोया की मौत पर सुनवाई के मामले में भी लगभग कुछ इसी प्रकार के हालात सामने आये थे।

इसके बाद न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 45 मिनट की सुनवाई के बाद याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए इस मामले को खारिज कर दिया। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति सीकरी के अलावा न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एके गोयल भी शामिल हैं।

यह याचिका दायर करने वाले सांसदों में पंजाब से कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा और गुजरात से अमी हर्षदराय याज्ञनिक शामिल हैं।