बीएचयू की चीफ प्रोक्टर भी बनी जी सी त्रिपाठी, बीएचयू में फिर गूंजे विरोध के नारे

आईएनएन भारत डेस्क
एक निजी न्यूज चैनल पर बीएचयू चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह के दिये बयान ने विश्वविद्यालय के लंका गेट को फिर से एक बार आंदोलन का दरवाजा बना दिया है। प्रो. रोयना सिंह ने टीवी चैनल को यह अटपटा बयान दिया था कि सितंबर में हुआ आंदोलन फंडेड था तथा आंदोलन में ट्रक भर-भर कर पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक आते हुए देखा गया था। इसके बाद बीएचयू के छात्र एवं छात्राएं रोयना सिंह से इस बयान पर प्रमाण मांगने पहुँच गये। परंतु रोयना सिंह ने छात्रों पर धारा 147, 148, 353, 332, 427, 504, 393 और धारा 307 में हत्या के प्रयास, मारपीट, तोड़फोड़, सरकारी कागजात से छेड़छाड़ के फर्जी आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी। एफआईआर को पूरा नटकीय बनाते हुए रोयना सिंह ने यहाँ तक लिखवा दिया गया कि एक छात्रा ने रोयना सिंह को पीछे से पकड़ रखा था और दूसरी छात्रा उनका गला दबा रही थी।

ध्यान रहे कि पूरे घटनाक्रम के दौरान वहाँ भारी सुरक्षाबल मौजूद था, रोयना सिंह पर हमला तो दूर छात्रों को सुरक्षाकर्मियों ने चीफ प्रॉक्टर से मिलने तक नही दिया जबकि अंत तक वह अपने केबिन में बनी हुई थीं।

एफआईआर के साथ रोयना सिंह ने जो मेडिकल रिपोर्ट संलग्न की हैं उसमें केवल रक्तचाप बढ़ने की बात है तथा किसी गंभीर शारीरिक चोट का जिक्र उसमें नहीं है जबकि अपने बयान में उन्होंने एफआईआर में पपेरवेट से हमला करने की बात कही है जिसमें 4 अन्य लोग के भी घायल होने का जिक्र है।

छात्रों का दावा है कि लंका थानाध्यक्ष संजीव मिश्रा स्वयं घटनास्थल पर पूरे समय मौजूद थे और उन्होंने यह बात स्वीकार भी की है। छात्रों ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद शनिवार से विश्वविद्यालय गेट पर धरने की शुरूआत की और एफआईआर को तुरंत वापस लेने और प्रो रोयना सिंह के इस्तीफे की मांग की है। थानाध्ययक्ष ने छात्रों के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने बीएचयू प्रशासन को 2 दिन का अल्टीमेटम दिया है, ठोस साक्ष्य न उपलब्ध करा पाने पर वह स्वयं यह एफआईआर रद्द करेंगे।

धरने और विरोध कर रहे छात्रों का कहना था कि चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह को अपने बयान पर सावर्जनिक माफी मांगनी चाहिए और छात्र-छात्राओं पर हत्या के प्रयास जैसे कई गंभीर मामलों मे फर्जी एफआईआर कराने और कैंपस में लगातार छात्रों से गलत व्यवहार करने के कारण इस्तीफा देना चाहिए।

ध्यान रहे कि पिछले साल सितंबर में स्थानीय लंपटों के लगातर यौन उत्पीड़न से तंग आकर छात्र छात्राओं ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जबरदस्त आंदोलन छेड़ दिया था जिसके कारण विश्वविद्यालय के उप कुलपति गिरीश चन्द्र त्रिपाठी को अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में लंबी छुट्टी पर जाना पड़ा था और उसी समय पहली महिला चीफ प्रोक्टर के बतौर प्रो रायना सिंह की नियुक्ति हुई थी। फ्रांस के समुद्र तटीय कस्बे राइना में 1972 में जन्मी प्रो रायना सिंह से विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं को काफी उम्मीदें थी परंतु एक साल भी अभी उनकी नियुक्ति को नही हुआ है कि वह भी पूर्व उप कुलपति की राह पर जाती दिखाई पड़ रही हैं।