मोदी का कमजोर इतिहास ज्ञान कर्नाटक में भाजपा को कर रहा है फायदा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी पार्टी भाजपा और उसके मातृ संगठन में बड़े भाषणबाज नेता माने जाते हैं परंतु जिस प्रकार का इतिहास बोध उनके भाषणों से झलकता है वह प्रधानमंत्री पद की गरिमा को तार तार करने वाला है। ऐसा भी नही कि उनका यह इतिहास बोध कोई एक या दो बार जाहिर हुआ हो बल्कि दर्जनों बार उनका इतिहास बोध उन्हें उपहास का पात्र बना चुका है। हाल ही में कर्नाटक में दिये गये अपने एक भाषण में की गई ऐसी ही ऐतिहासिक घटनाक्रम के बारे में उनके ज्ञान ने उन्हें फिर से हंसी का पात्र बना दिया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं से लेकर संपूर्ण विपक्ष और स्वराज पार्टी के योगेन्द्र यादव तक के निशाने पर उनका यह भाषण और उनका सामान्य ज्ञान आ चुका है।

 

हालांकि उनके इस सामान्य ज्ञान से उन्हें कर्नाटक चुनावों में फायदा हुआ है। अभी तक कर्नाटक चुनावों में भाजपा द्वारा दागियों को भारी संख्या में टिकट दिये जाने की चर्चा ही मीड़िया और सोशल मीड़िया में छायी हुई थी परंतु मोदी के इस सामान्य ज्ञान की गलती ने भाजपा के टिकट बंटवारे के गुनाह को पूरी तरह से सुर्खियों से गायब कर दिया है। यह मोदी और पीएमओ अथवा संघी टोले की जानबूझकर की गई गलती भी हो सकती है और मोदी की इतिहास की कम जानकारी भी परंतु कुछ भी हो इस एक छोटी सी चूक ने भाजपा के बड़े गुनाह पर पर्दा डाल दिया है। अब मीड़िया से लेकर सोशल मीड़िया तक सभी लोग मोदी की मजाक उड़ाने में लग गये हैं और बेल्लारी बंधुओं से लेकर विधानसभा में पोर्न वीडियों देखने वाले भाजपा के पूर्व मंत्री और विधायक और ऐसे ही कुछ अन्य दागी टिकट पाकर भी सोशल मीड़िया में उनके खिलाफ चल रहे अभियान से छुटकारा पा गये हैं।

 

ऐसा पहली बार नही है कि इस प्रकार की बयानबाजी और गलत बयानी भाजपा को फायदा दे रही है। ऐस बयान देकर अथवा इस प्रकार की नाकारात्मक राजनीति से कैसे फायदा उठाना है इसमें कोई भी प्रतिक्रियावादी दक्षिणपंथी राजनीति पारंगत होती ही है। पिछले कुछ सालों में प्रत्येक संसद सत्र से पहले इस प्रकार की घटनाओं का सामने आना अथवा किसी छोटे मोटे घोटाले का उजागर होना और उसके नाम पर संसद नही चलने देना परंतु अपने लाभ के और कारपोरेट घरानों के पक्ष के और सरकार को फायदा देने वाले बिलों को बगैर बहस के पारित करवा लेना इस मोदी सरकार की रणनीति का हिस्सा रहा है।
पिछले संसद सत्र से पहले जब संसद में राफेल समझौते को लेकर विपक्ष मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में था तो तभी नीरव मोदी, मेहुल चोकसी धोखाधड़ी का मामला सामने आ गया और संसद सत्र में गतिरोध शुरू हो गया। उसके बाद जब विपक्ष संसद में बहस करने के लिए तैयार हो गया और यहां तक कि उसने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक दे डाला तो भाजपा ने अपनी परम सहयोगी एआईएडीएमके और टीआरएस जैसी क्षेत्रिय पार्टियों से हंगामा करवाकर संसद को ठप करवा डाला। परंतु वित्त विधेयक और चुनाव सुधार के ऐसे सभी बिल चुपके से बिना बहस पास करवा लिये जिससे सरकार का फायदा था और बहस होने पर उनमें बदलाव की संभावना थी या देश के सामने उन बिलों की असलियत आ सकती थी। परंतु यही बिल पास करवाने वाली सरकार अविश्वास प्रस्ताव को हंगामे का हवाला देकर टालती रही। हालांकि सरकार के पास बहुमत है और सरकार को कोई खतरा नही था। लेकिन मोदी सरकार की अविश्वास प्रस्ताव पर जो किरकिरी होती मोदी सरकार हंगामा करवाकर और संसद में अवरोध पैदा करके उससे बच गई।

 

मोदी का कर्नाटक में दिया गया भाषण और उसमें उनका कम इतिहास बोध फिर से मोदी सरकार की उसी रणनीति का हिस्सा है। जिसमें एक छोटी सी गलती से बड़े गुनाह को छुपाया गया है। मोदी की इस छोटी सी गलती से मोदी भक्तों पर कोई असर पड़ने वाला नही है परंतु जिन लोगों को भाजपा ने कर्नाटक में टिकट दिये हैं उनकी चर्चा मीड़िया और सोशल मीड़िया में होने से भाजपा को बड़ा नुकसान जरूर होता और उसी नुकसान को कम करने की रणनीति के तहत मोदी ने कम ज्ञान का यह जुमला छोड़ा है और उनके भक्तों को इससे एक बार फिर नेहरू पर अपनी कुतर्की बहस को आगे बढ़ाने का मौका मिल गया है और बहस का कुतर्की एजेंडा फिर से मोदी ने हासिल कर लिया। हालांकि अभी तक कर्नाटक में राजनीति का एजेंडा सूबे के मुख्यमंत्री सेट कर रहे थे और इस कारण लाभ की स्थिति में भी थे और भाजपा उनके एजेंडे पर प्रतिक्रिया देने के अलावा कुछ नही कर पा रही थी। पहली बार मोदी कर्नाटक में अपने कुतर्की एजेंडे से बहस का विषय बदल रहे हैं, जिसका मकसद कांग्रेस के फायदे को कम करना है। अब वह कांग्रेस का फायदा कम करें या नही भाजपा का नुकसान कम करने में जरूर कामयाब हो रहे हैं।