अनुसूचित जाति उत्पीड़न की बर्बर घटनाओं ने यूपी को बनाया “भगवा जंगलराज”

आईएनएन भारत डेस्क

बदायूंः यूपी में बहुजन जातियों पर बर्बर हमलों की घटनायें रोजाना नये मुकाम छू रही हैं। लगता है कि ब्राहमणवादी आतंकवाद अपने चरम पर पहुंच चुका है और पूरी तरह से इस बेलगाम भगवा आतंक ने अब देश के सबसे बड़े सूबे को भगवा जंगलराज में तब्दील कर दिया है। ताजा घटना कुछ दिन पहले की है। यह घटना बदायूं जिले के हजरतपुर थाना इलाके के आजमपुर गांव की है। यहां के रहने वाले दलित ने पुलिस को बताया कि 24 अप्रैल को वह अपने खेत में गेंहू काट रहा था। तभी उसी के गांव के ही रहने वाले विजय सिंह, विक्रम सिंह, पिंकू और सोमपाल उसके पास आये और अपने खेत में खड़ा गेंहू काटने को कहा। वे चाहते थे कि वह पहले उनके खेत का गेहूं काटे।

 

दलित ने उनका गेहूं काटने से मना किया तो उन लोगों ने खेत में ही उसकी जूतों से पिटाई की और जबरन गांव ले आए, जहां पेड़ से बांधकर उससे मारपीट की और जूते में पेशाब पिलाने जैसे अमानवीय और बर्बर कृत्य किया गया। दबंगों को केवल इससे भी चैन नही पड़ा और उन्होंने उस व्यक्ति को उसकी मूंछे भी उखाड़ लीं।

 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि पीड़ित ने डायल-100 पर सूचना दी थी कि कुछ लोग उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। पुलिस मौके पर पहुंची थी और कार्रवाई करके वापस लौट आई। पुलिस से भी दंबगों को फर्क नही पड़ा अथवा कार्रवाई केवल नाममात्र की और पक्षपातपूर्ण रही होगी। जैसा कि आजकल यूपी में ठाकुरशाही को छूट है। पुलिस के लीपापोती के बाद वापस आने पर लगभग 50 मिनट बाद वाल्मीकि की पत्नी ने भी डायल-100 पर फोन किया और बताया कि उसके पति से कुछ लोग मारपीट कर रहे हैं।

 

पुलिस की टीम ने फिर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की थी। 24 अप्रैल के इस मामले में 29 अप्रैल को मुकदमा दर्ज किया गया और 30 अप्रैल को आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में धारा 308, 342, 332, 504, 506 तथा दलित एक्ट के तहत प्राथमिकी पंजीकृत की गयी है। बाद में मामले के सोशल मीड़िया में तूल पकड़ने पर हजरतपुर के थानाध्यक्ष राजेश कश्यप को लापरवाही बरतने के आरोप में निलम्बित कर दिया गया है।