आदिवासी दे रहे हैं आजादी की नई दस्तक

हिमांशु कुमार
जबर्दस्त घटना हो रही है, जिसके बारे में शहरी लोगों को पता नहीं है, लेकिन इस घटना से सरकार बहुत डरी हुई है, आदिवासियों ने अपने गाँव आजाद घोषित करने शुरू कर दिए हैं।

मैंने गुजरात में जाकर इस तरह के गाँव में लोगों से मुलाकात करके पूरी जानकारी ली। आदिवासियों ने अपने गाँव के बाहर सूचना लगा दी है कि भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची के मुताबिक अबसे इस गाँव की जमीन, जंगल और विकास के बारे इस गाँव के आदिवासी खुद ही फैसला करेंगे। इस गाँव में कोई भी सरकारी कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, पुलिस वाले या वन विभाग के लोग इस गाँव में प्रवेश ना करें।

इस तरह की आजादी की घोषणा झारखंड और छत्तीसगढ़ के आदिवासियों ने भी करनी शुरू कर दी है। झारखंड और छत्तीसगढ़ के आदिवासियों ने अपनी परम्परा के मुताबिक आजादी की यह घोषणा पत्थर पर लिख कर गाँव के बाहर लगा कर कर दी है।

इससे सरकार पुलिस और कम्पनियां घबरा गई हैं। भाजपा के लुटेरे नेता और गुंडे, कम्पनियों से रिश्वत खाकर काम करने वाले पुलिस के अधिकारी और उनके साथी भ्रष्ट अखबार के मालिक मिल कर आदिवासियों की इस घोषणा के खिलाफ मिल कर हमला बोल रहे हैं।

हाल ही में कई आदिवासी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने जेल में डाल दिया है। भाजपा के गुंडों ने पत्थरों को उखाड़ दिया है और आदिवासियों पर हमला किया। पुलिस ने घायल आदिवासियों को ही जेल में डाल दिया है।

मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने इस घटना के खिलाफ और आदिवासियों के पक्ष में बयान जारी किया है। पूर्व कृषि मंत्री और आदिवासी नेता अरविन्द नेताम ने भी पुलिस के इन हमलों का विरोध किया है।

इस महान क्रांति को हो सकता है गर्भ में ही मार दिया जाय, लेकिन यह तो तय है कि इतिहास आदिवासियों के इस विद्रोह और आजादी के इस उद्घोष को बहुत महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज करेगा।

(हिमांशु कुमार की फेसबुक वाॅल से साभार)