आम आदमी का वकील जिसने भेज दिया आसाराम को जीवन भर के लिए जेल

आईएनएन भारत डेस्क
ढ़ोंगी संत और उन्मादी राजनीति के करीबी सखा आसाराम द्वारा एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला आखिर अपने अंजाम तक पहुंच ही गया। इस मामले में कई उतार चढ़ाव आये और उसी के साथ कई देश के नामी और मंहगे वकील भी आसाराम की पैरवी करने के लिए आये। बगैर इस बात की फिक्र किये कि इससे उनकी छवि पर क्या फर्क पड़ेगा, इस केस में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज यूयू ललित तक भी पैरवी करने खड़े हुए तो वहीं राम जेठमलानी, सलमान खुर्शीद तक भी आसाराम के वकील बने। परंतु नाबालिग के साथ दुराचार के मामले में आसाराम को जोधपुर अदालत से उम्र कैद की सजा सुनवाने वाले पीड़िता के वकील का कहीं कोई जिक्र और नाम सामने नही आया। परंतु इस केस के फैसले के बाद इस पूरे मामले में कभी भी बिकने वाला और बगैर फीस लिये पीड़िता के लिए लड़ने वाला वकील पूनम चन्द सोलंकी आज चर्चाओं में है।

फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने जहां राहत की सांस ली तो वहीं पूनम चन्द सोलंकी सोशल मीड़िया में एक हीरो की तरह छा गये हैं। इस फैसले के तुरंत बाद पीड़िता ने कहा ‘थैंक्स गॉड आपने ढोंगी बाबा को उसके किए की सजा दिला ही दी‘। परंतु इस मामला का फैसला आने के बाद सोशल मीड़िया पूनम चन्द सोलंकी को अपने अंदाज में धन्यवाद कह रहा है। यह धन्यवाद उनकी तारीफों और पेशे से निष्ठा और गरीब परिवार के साथ हर वक्त खड़े रहने के उनके जज्बे की खबर के रूप में सोशल मीड़िया पर छाया हुआ है।

इस हीरो को सोशल मीड़िया पर लोग अपने अंदाज में सलाम कर रहे हैं। वह वकील सोलंकी ही हैं जिन्होंने बिना डरे, गरीब परिवार के लिए ही लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि धर्म के नाम पर ढोंग का भी पर्दाफाश भी किया। ध्यान रहे कि मुजरिम आसाराम ने अपने बचाव के लिए राम जेठमलानी, सुब्रमण्यम स्वामी और यूयू ललित जैसे देश के नामचीन वकीलों को हायर किया मगर आखिर में जीत स्कूटी से चलने वाले एक आम आदमी के वकील पुनम चंद सोलंकी की ही हुई। इनके बारे में सोशल मीडिया में यह भी चर्चा खूब जोरो पर है कि इन्हांेने पीड़िता का केस मुफ्त में लड़ा है।

फैसले के बाद टाईम्स आॅफ इण्ड़िया से बात करते हुए पूनम चन्द सोलंकी ने कहा कि जब हमें भ्रष्ट और अपराधी के रूप में एक स्वयंभू ईश्वर से लड़ना है, तो हमें कानूनी ढांचे के भीतर खुद को कर्मठ और प्रतिबद्ध दिखाना ही होगा। सोलंकी ने निर्णय के उन्होंने कहा कि मैं अपने कई वरिष्ठ नागरिकों का आभारी हूं जिन्होंने वकालत शुरू करने के दौरान मेरे अंदर सही मूल्य पैदा किए।