खनन माफिया और विधानसभा में पोर्न मूवी देखने वाले कर्नाटक में बने भाजपा उम्मीदवार

आईएनएन भारत डेस्क
जीत की भूख आपके दावों और हकीकत का फर्क बता देती है। कभी कर्नाटक के खनन घोटाले के रचनाकार माने जाने वाले और नोटबंदी के बाद शादी में सैंकड़ों करोड़ खर्च करके भाजपा की किरकिरी करवाने वाले रेड्डी बंधुओं का भाजपा ने जीत के लिए फिर से दामन थाम लिया है। अभी दो सप्ताह पहले ही एक प्रेस वार्ता में जी रेड्डी और उ नके यहयोगियों के बारे में पूछे जाने पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने किनारा कर लिया था। परंतु जीत की भूख और कुर्सी की चाहत ने दो सप्ताह में ही सभी कुछ बदलकर रख दिया है और अब जी रेड्डी उनके बंधु और सहयोगियों ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए कुल मिलाकर भाजपा से सात टिकट हासिल कर लिये है।

केवल रेड्डी बंधु ही नही 2012 में कनार्टक विधानसभा में पोर्न मूवी देखते पकडे गये अपने तीन नेताओं को भी भाजपा ने फिर टिकट दे दिया है। हालांकि भाजपा के इस कदम की चारो तरफ आलोचना भी हो रही है। यहां तक उनके कईं पूराने सहयोगी भी भाजपा के इस कदम के मद्देनजर अमित शाह को निशाने पर ले रहे हैं। ध्यान रहे कि जब कर्नाटक में भाजपा सरकार सत्ता में थी, तब सरकार में मंत्री और भाजपा विधायक लक्ष्मण सावादी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मोबाइल फोन पर पोर्न देखते पकड़े गए थे। इस दौरान तत्कालीन सरकार में पर्यावरण मंत्री जे. कृष्णा पालेमर और महिला एवं बाल विकास मंत्री सीसी पाटिल भी लक्ष्मण सावदी के फोन में पोर्न देखने मशगूल थे। विधानसभा में उस वक्त सूखे के हालात पर चर्चा चल रही थी। इस दौरान विधानसभा की कार्यवाही कवर कर रहे मीडिया के कैमरों ने इन मंत्रियों को पोर्न देखते रंगे हाथ पकड़ा था। इस घटना के मीडिया में आने के बाद काफी हंगामा हुआ था। विपक्षी पार्टियों ने आरोपी नेताओं के इस्तीफे की भी मांग की थी। अभी वही तीनों भाजपा नेता फिर से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।

विधानसभा में कथित पोर्न मूवी देखते भाजपा विधायक और मंत्री

जहां तक रेड्डी बंधुओं का सवाल है उन पर खनन अनियमितताओं को लेकर कई मामलें लंबित हैं और एक मामले में जी रेड्डी कईं सालों तक जेल में रह चुके हैं और बाहर आने के कुछ दिनों बाद फिर से उन्हें एक अन्य मामले में महीनों के लिए जेल जाना पड़ा था। अब रेड्डी बंधु और उनके सहयोगी फिर से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। भाजपा के एक राज्य नेता का मानना है कि यदि उन्हें टिकट नही दिया गया तो वह भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे और भाजपा को 11-12 सीटों पर इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि येदियुरप्पा का जादू भी अब खत्म हो चुका है। इसीलिए रेड्डी बंधुओं को सत्ता हासिल करने के लिए साथ लेना जरूरी है।

बता दें कि रेड्डी बंधुओं पर 35 हजार करोड़ के अवैध खनन के आरोप लगे थे और उनके खनन कारोबार के कारण एक समय में कर्नाटक को सबसे भ्रष्ट राज्य का तमगा मिल गया था। इसके अलावा रेड्डी बंधुओं की दबंगई की चर्चा भी एक जामने में राज्य में काफी थी और उनकी इसी दबंगई के कारण बैल्लारी को बैल्लारी रिपब्लिक तक लोगों ने घोषित कर दिया था कि यहां उन्ही का राज चलता था। इसी कारण 2010 में सिद्धारमैया द्वारा विधानसभा में उनके खिलाफ बोलने पर जी रेड्डी ने खुलेआम धमकी देते हुए कहा था कि यदि उनमें हिम्मत है तो बैल्लारी आकर दिखाएं, वहां से वह सही सलामत वापस नही आ सकते हैं। वहां उन्हें मार मारकर खत्म कर दिया जायेगा। हालांकि उसके बाद सिद्धारमैया ने बैल्लारी तक अपनी प्रसिद्ध पदयात्रा का आयोजन किया था और बैल्लारी में कांग्रेस की एक विशाल रैली का आयोजन करके रेड्डियों को अपने अंदाज में जवाब दिया था। उसी के बाद रेड्डियों का किला और सत्ता ढहनी शुरू हो गयी थी। अब उसी पुरानी बची खुची सत्ता के दम पर रेड्डी बंधु इसे अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी मानकर लड़ने के लिए मैदान में उतर रहे हैं। परंतु अबकी बार कर्नाटक के सत्ता के खेल के असली खिलाड़ी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ही हैं बाकी सभी उनके दावों पर प्रतिक्रिया देने के अलावा कुछ नही कर पा रहे है। सूबे की राजनीति का एजेंडा तय करने वाले सिद्धरमैया ही हैं और भाजपा उनके एजेंडे की प्रतिक्रिया देने वाली पार्टी भर है।