आसाराम को आजीवन कैद की सजा,  सहायक और सहायिका भी 20-20 साल के लिए अंदर

आईएनएन भारत डेस्क
स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट ने आखिरकार बुधवार को रेप केस में आसाराम बापू को दोषी ठहरा ही दिया। इसी मामले में आसाराम के अलावा दो अन्य भी दोषी साबित हुए हैं। जहां आसाराम को आजीवन कैद की सजा हुई तो वहीं उसे दो अन्य सह आरोपियों को 20-20 साल की सजा हुई है।

जोधपुर की विशेष अदालत ने रेप के मामले में आसाराम को आजीवन कैद की सजा सुनाई तो फैसले को सुनते ही रेप पीड़िता के पिता की आंखों से आंसू बह निकले और उन्होंने मीडिया से मुखतिब होते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिल गया है और कहा कि आसाराम को दोषी ठहराया गया है, हमें न्याय मिला है। मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस लड़ाई में हमें समर्थन दिया। मुझे आसाराम को सख्त सजा मिलने की ही उम्मीद थी।

ध्यान रहे कि अगस्त 2013 में एक 16 साल की लड़की ने आरोप लगाया था कि आसाराम ने जोधपुर आश्रम में उसका यौन शोषण किया है। दो दिन के बाद ही पीड़िता के पिता ने दिल्ली जाकर आसाराम के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई थी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराने के बाद केस राजस्थान पुलिस को भेज दिया था। राजस्थान पुलिस ने आसाराम को पूछताछ के लिए 31 अगस्त 2013 तक का समय देते हुए समन जारी कर दिया था। परंतु पुलिस के समन के बावजूद आसाराम को कोई फर्क नहीं पड़ा और वो हाजिर नहीं हुआ था। जब वो हाजिर नहीं हुआ तो दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 342, 376 और 506 के तहत केस दर्ज कर दिया। पूरे देश ने देखा कि किसा प्रकार आसाराम पुलिस से बचने के सारे हथकंडे अपनाता रहा था। यहां तक कि उसने और उसके गुर्गो ने लड़की के परिवार को केस वापस लेने के लिए धमकाया भी था।

इसके अलावा आसाराम के दो सहयोगियों शिल्पी और शरद को 20-20 साल की सजा सुनाई गई है। इनमें आसाराम की सहयोगी शिल्पी की भूमिका इस पूरे मामले में अहम है। जिसने पीड़ित के परिजनों को यह मानने पर मजबूर किया था कि पीड़िता पर बुरी आत्मा का साया है और शिल्पी के समझाने के बाद ही पीड़िता के परिवार ने उसे जोधपुर आश्रम भेजा दिया था। बाद में नाबालिग पीड़िता सामने आयी और इसने ही आसाराम पर रेप का आरोप लगाया था।

आसाराम की परम सहयोगी 20 साल की सजायाफ्ता शिल्पी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा आश्रम की वार्डन थी। पूरे मामले की जांच में सामने आया था कि शिल्पी, आसाराम बापू के और पीड़िता के परिवार से संपर्क में लगातार थी। लड़की के बलात्कार से एक हफ्ते पहले आसाराम और शिल्पी के बीच होने वाली बातचीत का सिलसिला बढ़ गया था। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि शिल्पी का काम यही था कि वह ब्रेनवॉश करके लड़कियों को आश्रम भेजती थी। यह भी कहा गया कि शिल्पी और आश्रम का मध्यस्थ शिवा उस दिन आश्रम में ही था, जब बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ।

वास्तव में शिल्पी का असली नाम संचिता है और उसका पूरा परिवार आश्रम में सेवा करता था। शिल्पी के पास साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री है और वह 2005 में अहमदाबाद आश्रम में शामिल हुई थी। 2012 में उसने अपने परिजनों से कहा था कि उसे आश्रम का जीवन अच्छा लग रहा है। सरेंडर के दौरान चर्चा यह भी थी कि शिल्पी आसाराम की बेटी है। हालांकि, यह अभी तक सिर्फ चर्चा ही है और इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

क्या है पूरा मामला

आसाराम ने 15 अगस्त 2013 में अपने आश्रम में एक नाबालिग लड़की से रेप किया था। इसके बाद पिछले 4 साल 8 महीने से वह जेल में बंद हैं। बताया जाता है कि बुधवार को सजा का ऐलान होने से आसाराम ने 6 ग्लास पानी पिया था और जज का फैसला सुनने के बाद तथाकथित स्वयंभू भगवान आसाराम कोर्ट में सिर पकड़कर रो पड़ा था। जेल में दोषी करार दिए जाने से पहले आसाराम की तबीयत बिगड़ गई थी और इसीलिए जेल में एक एंबुलेंस का इंतजाम किया गया था। आसाराम सजा का ऐलान होने से पहले जेल में ‘हरि ओम‘ का जाप करता रहा था। जोधपुर सेंट्रल जेल को जाने वाली दोनों सड़कों को सुरक्षा की दृष्टि से सील कर दिया गया था। ड्रोन कैमरों के जरिए जेल के बाहर नजर रखी जा रही थी। फैसले को ध्यान में रखते हुए यूपी के शाहजहांपुर में पीड़ित लड़की के घर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

बता दें कि 77 साल के आसाराम के देश-विदेश में 400 से अधिक आश्रम हैं और आसाराम की संपत्ति 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है। यह भी कहा जाता है कि आसाराम के समर्थकों की संख्या चार करोड़ से अधिक है। आसाराम को सजा मिलने से पहले बुधवार सुबह देश भर में आसाराम के आश्रमों में उसके भक्त उसकी सलामती के लिए पूजा-पाठ और प्रार्थना कर रहे थे।