लंदन में विरोध से बैकफुट पर मोदी सरकार, पॉक्सो एक्ट में बदलाब को मंजूरी

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली। कठुआ से लेकर सूरत, एटा, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ रोज हो रहे बलात्कार के जो दिल दहलाने वाले मामले सामने आ रहे है। ख़ास तौर पर कठुआ की घटना (8 साल की बच्ची के साथ मंदिर में कई दिनों तक सामुहिक बलात्कार और हत्या) से भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हुई। पिछले दिनों इसी घटना के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध लन्दन यात्रा के दौरान किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत वापस आने के बाद पीएम आवास पर चली ढाई घंटे की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया कि दुष्‍कर्म के दोषियों को फांसी देने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा। भारत सरकार ने नाबालिग बच्चियों से दुष्‍कर्म के मामलों पर कठोर निर्णय लेते हुए पॉकसो एक्‍ट में बदलाव पर मुहर लगा दी है। इस बैठक में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्‍कर्म के मामलों में दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हो गया। इसके अलावा इस बैठक में यह निर्णय भी लिया गया है कि ऐसे मामलों में जांच तेजी से पूरी की जाएगी।

बता दें कि दुष्‍कर्म की हालिया घटना के बाद देश में काफी गुस्‍सा व्‍याप्‍त है। यहा तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लंदन दौरे के दौरान लन्दन में भी विरोध का सामना करना पड़ा। लंदन में “Modi Not Welcome” के नारे लगे और पोस्टर गाड़ियों पर लगा कर विरोध हुआ। भारत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी इंडिया गेट पर रात के 12 बजे आकर असिफा के बलात्कारियों को सजा और इस पर कठोर कानून बनाने की मांग की। पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी असिफा के इंसाफ के लिए लोग सड़कों पर उतरे। की जनता भी बार-बार इस तरह के मामलों में कठोर से कठोर सजा दिए जाने की मांग भी लगातार करती रही है। इसी जनभावना का सम्‍मान करते हुए केंद्र ने यह फैसला लिया है।

जाने पॉक्सो एक्ट के मौजूदा प्रावधान:

पॉक्सो (POCSO) के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, दुष्कर्म के दोषियों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है और न्यूनतम सात साल की जेल है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आता है। इसके तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है। यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है।