यशवंत सिन्हा ने बीजेपी छोड़ा, कहा भारत का लोकतंत्र खतरे में है

आईएन एन भारत डेस्क:
आज पटना स्थित श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में मिशन-2019 का आगाज़ करते हुए सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश को लेकर “राष्ट्रीय मंच” नाम से एक  कन्वेंशन आयोजित किया गया। इस मंच से यशवंत सिन्हा ने इस बार बीजेपी से अपने आप को अलग कर लिया। इन्होंने पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया। यशवंत सिन्हा ने कहा कि भाजपा के साथ सभी संबंधों को आज समाप्त करता हूं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज मैं दलगत राजनीति से भी संन्यास लेता हूं। अब बीजेपी से हमारा कोई रिश्ता नहीं। मैं बीजेपी से अपने सभी रिश्ते खत्म करता हूँ।

यशवंत सिन्हा ने कहा कि मैं आज के बाद किसी दल के साथ नहीं रहूंगा न ही किसी भी राजनितिक दल से कोई रिश्ता रखूंगा। उन्होंने कहा कि आज से चार साल पहले ही मैं सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुका हूं और अब मैंने चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर लिया है।

सिन्हा ने कहा कि हम देश की हालत पर विचार करने आए हैं। देश की स्थिति चिंताजनक हैं। जब देश मुसीबत में था, पटना ने रास्ता दिखाया था। आज भी देश को पटना रास्ता दिखाएगा। देश मे ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि किसी राज्य के विधानसभा चुनाव के कारण संसद का सत्र छोटा किया गया हो।

उन्होंने कहा कि आज जो कुछ हो रहा है, उसके खिलाफ यदि हम नहीं खड़े होते हैं तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी। इसके साथ ही सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का एक भाग सड़ गया है, जिससे बदबू आ रही है।

बता दें कि यशवंत सिन्हा ने पिछले दिनों किसानो के समर्थन में अनशन किये थे। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के जनता विरोधी नीतियों के खिलाफ खुलकर बोला था। पिछले दिनों नोटबंदी के फैसले और जीएसटी लागू करने के तरीके को लेकर भी मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला था।

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल पटना में प्रस्तावित इस अधिवेशन में देशभर के प्रमुख दलों के नेता एवं प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेत्री रेणुका चौधरी शामिल हुए। इसमें भाजपा सांसद शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के साथ ही जदयू के बागी नेता उदय नारायण चौधरी भी शिरकत कर रहे हैं। कार्यक्रम में कांग्रेस, राजद, त्रिमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी एवं सपा समेत भाजपा-जदयू के असंतुष्ट नेताओं को भी बुलाया गया है। परंतु ममता बनर्जी इस  अधिवेशन से अपने आप को अलग रखे हुए हैं।