एक एक कर आरोप मुक्त हो रहें हैं भाजपा नेता, माया कोडनानी बरी

आईएनएन भारत डेस्क
गुजरात हाई कार्ट ने नारोदा पाटिया दंगा मामले में गुजरात की पूर्व महिला और बाल विकास मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी को बरी कर दिया है। इसी मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने बाबू बजरंगी की सजा को बरकारार रखा है।

माया कोडनानी नरोदा पाटिया दंगा मामले में आरोपी थी और निचली अदालत से उन्हें सजा हो गयी थी। जिसे पलटते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया है। इस मामले में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि माया कोडनानी ने भीड़ को उकसाया था और नरोदा पाटिया में इसीलिए उन्होंने 97 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी।

गुजरात हाईकोर्ट ने 2002 के नरोदा पाटिया दंगा मामले में दायर अपीलों पर शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने गुजरात की मोदी सरकार में मंत्री रहीं कोडनानी को निर्दोष करार दिया है। 11 गवाहों में किसी ने भी कोडनानी का नाम नहीं लिया. इसके अलावा कोर्ट ने माया कोडना के पर्सनल एस्सिटेंट किरपला सिंह छाबड़ा को भी बरी कर दिया है। हाई कोर्ट ने पीड़ितों द्वारा दायर की गई मुआवजे की मांग की याचिका भी ठुकरा दी है।

माया कोडनानी के बरी किये जाने पर सोशल मीड़िया में इस पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गयी है। लोगों ने यहां तक कह डाला कि देखते जाइये धीरे धीरे सभी बरी हो जायेंगे और अंत में सिद्ध होगा कि किसी ने किसी को नही मारा और और इस दंगे में 1000 लोगों के मरने की घटना मनगढ़ंत है। या वह खुद ही मारे गये थे।

तहसीन पूनावाला ने तो ट्वीट कर यहां तक लिख दिया कि माया कोडनानी जो पहले से ही जेल से बाहर थी उन्हें अब बरी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि क्या होने वाला है यह इसी से सिद्ध होता है कि नरोदा पाटिया में दंगों की आरोपी माया कोडनानी को गुजरात नरंसहार के बाद ही महिला और बाल विकास मंत्री बनाया गया था। नारोदा पाटिया में निर्दोष महिलाओं और मासूम बच्चों के नरसंहार के बाद।
ध्यान रहे कि 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही माया कोडनानी सजा सुनाये जाने के बाद मेडिकल आधार पर जेल से बाहर हैं। लोग सोशल मीड़िया पर इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

वैसे जिस प्रकार से मक्का मस्जिद और दूसरे विस्फोट के मामलों में और अब नरोदा पाटिया में गवाहों की भूमिका अथवा उनके पलट जाने आरोपी और वह भी विशेषकर भाजपा और संघ से जुड़े आरोपी उस पर लोगों का सवाल उठाना जायज भी है।

लगता है विस्फोटों से लेकर गुजरात नरसंहार अथवा अन्य हत्या काण्ड़ों में जो सैंकड़ों लोग मारे गये उनका कोई हत्यारा अथवा हत्यारे नही हैं। लोग कत्ल हुए हैं और उनका कोई कातिल नही है। भारत की न्याय प्रणाली का इससे बड़र मजाक ना कभी उड़ा था ना उडेगा। पहले कहावत थी इंसाफ में देरी, नाइंसाफी ही है। परंतु अभी नई कहावत बन जायेगी लगता है। इंसाफ अभी नही, इंसाफ कभी नही।