जज लोया पर फैसले को विशेषज्ञों ने बताया इतिहास का काला दिन

आईएनएन भारत डेस्क
सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया मामले में किसी नई जांच से इंकार कर दिया है। जिस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण और सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का काला दिन बताया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में जांच के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं उसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इसे निचली आदलत की सुनवाई के आधार पर खारिज कर दिया।

वहीं कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर कईं तरह के सवाल उठाते हुए कहा कि यह देश के इतिहास में एक दुखद दिन है। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि इस फैसले ने कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अपराधिकता और कमी के सवालों को केवल एक जांच से ही तय किया जा सकता था। बगैर जांच के कोई भी यह दावा नही कर सकता है कि यह मौत प्राकृतिक थी अथवा अप्राकृतिक।

सुप्रीम कोर्ट ने लोया मामले में फैसला देते हुए कहा कि यह मौत प्राकृतिक है और जांच की याचिका को खारिज किया जाता है। जबकि सुरजेवाला ने जवाब में कहा है कि यह मौत प्राकृतिक नही है।

सुरजेवाला ने कहा कि जज लोया की बहन ने आरोप लगाया था कि आरोपी के पक्ष में फैसला देने के बदले जज को 100 करोड़ की रिश्वत और एक फ्लैट मुम्बई में देने की पेशकश की गई थी। जज लोया की ईसीजी और हिस्टोपैथोलोजी रिपोर्ट दिखाती है कि उनके हार्ट अटैक का कोई साक्ष्य नही है। एम्स के डाक्टर आर के शर्मा ने साफ कहा था कि जज को हार्ट अटैक के कोई लक्षण नही थे और ऐसे लक्षण थे कि जज के सिर पर तेज हथियार से हमला किया गया था।

पूछने पर कि जज लोया का मुम्बई से नागपुर यात्रा का कोई साक्ष्य नही है, सुरजेवाला ने कहा कि इस यात्रा के दौरान जज लोया के साथ कोई सुरक्षा नही थी। उन्होंने कहा कि इसका कोई रिकार्ड नही है कि लोया एक होटल में ठहरे थे और इसका भी कोई कारण नही है कि जब पास वाला कमरा उपलब्ध था तो दो जज ही कमरे के दो बिस्तरों पर सोय थे।

सुरजेवाला ने कहा कि लोया के परिवार ने साफ कहा था कि उनके कपड़ों विशेषकर गर्दन के पास लहू के निशान थे। सुरजेवाला ने कहा कि लोया के दो दोस्त जिन्होंने उन पर सोहराबुद्दीन मामले में दबाव की बात कही थी, उनकी भी रहस्यपूर्ण तरीके से मौत हो चुकी है।

सुरजेवाला ने दोहराया कि जब विशेषज्ञों का मत, फोरेंसिक साक्ष्यों, ईसीजी आदि में उपयुक्त संदेहजनक साक्ष्य हैं तो एसआईटी जांच की इजाजत क्यों नही। कानून के अनुसार पुलिस अधिकारी के सामने चार आदमियों के बयानों का कोई मूल्य नही है। उन्हें सच और झूठ को सामने लाने के लिए इस मामले में जांच करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा सार्वजनिक रूप से एक संवाददाता सम्मेलन में जज लोया के सवाल को उठाना यह सिद्ध करता है कि वे अधिकारों की रक्षा और न्यायपालिका की रक्षा को लेकर चिंतित थे।

भाजपा द्वारा इस मामले की याचिका में राहुल गांधी का हाथ बताये जाने पर निशाना साधते हुए रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा का रूख उनकी हताशा को जाहिर करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता की मांग के अनुसार जज लोया की संदेहास्पद परिस्थिति में हुई मौत की साफ सुधरी जांच के लिए प्रतिबद्ध है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर फैसले पर सवाल उठाने वालों की सोशल मीड़िया पर बाढ़ सी आ गई है। लोग जमकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। कुछेक ने यहां तक कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने एक नजीर पेश कर दी है कि केवल कागजी सबूतों के आधार पर बगैर किसी जांच के और अन्य साक्ष्यों को देखे सुने फैसला कर दयिा जाये। आगे से गंभीर अपराधिक मामलों में इसी प्रकार के फैसले होंगे।