अनुसूचित, पिछडी जातियों पर लगातार जारी है संघी प्रशासन और ठाकुरशाही का कहर

आईएनएन भारत डेस्क
किसी भारत बंद के बाद अथवा उसके अलावा भी किसी प्रदर्शन के बाद इस तरह की कार्रवाईयां नही देखी गयी जैसा नजारा यूपी की अजय सिंह बिष्ट सरकार कर रही है। ऐसी ठाकुरशाही और संघी जातिवाद दुलर्भ है जिसका उदाहरण यूपी सरकार और उसका पुलिस प्रशासन पेश कर रहा है।

मध्य प्रदेश में एक राजा ठाकुर ने बहुजनों के प्रदर्शन पर गोली चलाई और भीड़ पर हमले का दुःसाहस किया परंतु कोई खबर उस हमलावर से हथियार बरामदगी और दर्जनों धाराओं में मुकदमें की सुनाई और दिखाई नही पड़ी। सहारनपुर में अनेकों रिपोर्टें प्रकाशित हो चुकी हैं कि किस प्रकार राजपूतों ने दलितों के घरों पर विचित्र किस्म के गुबारेनुमा अग्नेयास्त्रों से हमले करके उनके घरों को जलाया और किस प्रकार राजपूतों के एक संगठन ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया परंतु गुनहगार ठहराया गया अपने समाज की बेहतरी के लिए संघर्षशील नौजवान चन्द्रशेखर और उसके सहयोगियों को। 10 अप्रैल को बिहार में सवर्णों के विभिन्न संगठनों ने खुलेआम उत्पात मचाया कहीं कोई दजर्नों मुकदमों का कहर नही। राजस्थान में बहुजनों के प्रदर्शन पर हमला करने वाली करणी सेना पर कोई दर्जन भर मुकदमें नही ना ही उनके हथियारों की कोई बरामदगी। परंतु ठाकुर अजय सिंह बिष्ट की पुलिस का कहर यूपी में थमने का नाम नही ले रहा है। वही यूपी जहां बलात्कार के आरोपी ठाकुर को बलात्कार के महीनों बीत जाने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर गिरफ्तार किया जाता है। क्योंकि यूपी में बलात्कार अपराध नही होता और ठाकुर का बलात्कार को एक सांस्कारी काम है अपराध नही।

परंतु जब बात अनुसूचित जातियों/जन जातियों अथवा पिछडे वर्गों की आती है तो पुलिस प्रदर्शन में सवर्णों द्वारा भडकाई गई हिंसा में दजर्नों धाराओं में मामले दर्ज करती है और रिकार्ड समय में इतिहास बनाते हुए चार्जशीट भी दाखिल कर देती है। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में पुलिस ने सोमवार को कुल 11 मुकदमों में बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। योगेश वर्मा सहित सौ से ज्यादा उपद्रवियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किए गए हैं। इन सभी पर गुंडा एक्ट, बलवा, जानलेवा हमला, आम्र्स एक्ट जैसी कुल 16 धाराएं लगाई गई हैं। दो अप्रैल को योगेश वर्मा पर कुल 25 मुकदमे दर्ज हुए थे। शेष 14 मुकदमों में भी दो-तीन दिन के भीतर चार्जशीट लग जाएगी।

इसी सप्ताह मेरठ पुलिस-प्रशासन योगेश वर्मा पर रासुका लगाने की भी संस्तुति कर सकता है। पुलिस ने इसके लिए बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा को दोषी मानते हुए 2 अप्रैल की शाम को ही गिरफ्तार कर लिया था। मेरठ पुलिस ने इस मामले में मात्र 15 दिन में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर रिकॉर्ड बनाया है। कंकरखेड़ा थाने में योगेश वर्मा सहित 144 लोगों पर कुल पांच मुकदमे दर्ज हुए थे। इसमें से योगेश सहित 88 लोग जेल जा चुके हैं। दौराला सीओ पंकज कुमार सिंह के मुताबिक, जेल गए योगेश सहित 88 के खिलाफ सोमवार को एसीजेएम-10 की अदालत में चार्जशीट फाइल कर दी गई।

दो अप्रैल को हिंसा में कंकरखेड़ा पुलिस ने जब योगेश वर्मा को गिरफ्तार किया था तो उनसे तमंचे और अन्य अवैध हथियार बरामद दिखाए थे। पुलिस ने योगेश वर्मा, गोपाल सिंह चंदाना और सुनील जाटव पर आम्र्स एक्ट के तीन मुकदमों में अलग से चार्जशीट लगाई है।

बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा के खिलाफ दो अप्रैल को जितने भी मुकदमे दर्ज हुए थे, उन सभी मामलों में चार्जशीट सोमवार को पेश की गई। ऐसा पहली बार है जब एक अभियुक्त के खिलाफ पूरे जिले के मुकदमे में एकसाथ चार्जशीट लगाई गई हो। दो अप्रैल की हिंसा में योगेश वर्मा पर कुल 25 मुकदमे दर्ज हुए थे। इसमें से कई थानों की पुलिस ने सोमवार को चार्जशीट कोर्ट में कर दी है।

वहीं पूर्व विधायक के समर्थकों और उनकी पत्नी मेरठ की मेयर सुनीता वर्मा का कहना है कि पुलिस ने योगेश वर्मा और अन्यों को गलत फंसाया है। इसके साथ ही एक वीडियो भी उनके समर्थकों की ओर से जारी की गई है, जिसमें वो दंगाइयों को रोकते और समझाते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन पर खुद पथराव हो रहा है और उनके निजी अंगरक्षक उन्हें कवर करने की कोशिश कर रहे हैं। इस वक््त उनके साथ पुलिस भी थी। मेरठ की मेयर सुनीता वर्मा कहती हैं कि, इस वीडियो से यह पता चलता है उनके पति को झूठा फंसाया गया है।

सुनीता वर्मा का कहना था कि, दरअसल हाल ही में मेरठ जिला योजना समिति के चुनाव में यहां भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया था और उनके पति ने मेरठ में भाजपाई सरकार को हिलाकर रख दिया था। अब भाजपा शक्ति का दुरुपयोग करते हुए उन्हें फंसा रही है। योगेश वर्मा मेरठ जनपद सहित आसपास में बहुजनों के सबसे कद्दावर नेता समझे जाते हैं। उनके जेल जाने से यहां दलितों में गहरी निराशा है।

गिरफ्तारी के बाद अपने पति से मिलने जेल पहुंची, सुनीता वर्मा को योगेश वर्मा से मिलने भी नही दिया गया था क्योंकि उस दिन उनके पास आधार कार्ड नही था।