राम मंदिर सवाल बना भाजपा-संघ के गले की फांस

आईएनएन भारत डेस्क
अहमदाबादः अभी तक राम मंदिर और हिंदुत्व के सवाल पर राजनीति करने वाली भाजपा और संघ पहली बार इन सवालों को नही उठाने की गुहार अपने एक नेता से कर रहे हैं। शायद यह भाजपा-संघ के लिए एक अजीब स्थिति है कि जिन सवालों को भुनाकर और जनता की भावनाओं को उभारकर वह सत्ता में पहुंची है, वही सवाल उसे अब तकलीफ दे रहे हैं।

वास्तव में विश्व हिंदू परिषद की सत्ता से बाहर होने के बाद विहिप के अन्तर्राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष रहे प्रवीण तोगड़िया ने संघ-भाजपा को परेशान करने के लिए राम मंदिर के सवाल पर आमरण अनशन करने का ऐलान कर दिया है और तोगड़िया का यही ऐलान संघ और भाजपा के गले की फांस बन गया है। अभी तक संघ परिवार इस मुद्दे का उपयोग रणनीतिक तरीके से जान बुझकर लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए करता था परंतु प्रवीण तोगड़िया ने अपनी हार के बाद इस मसले को अपनी ताकत बनाने के नजरिये से इस सवाल पर अनशन का ऐलान कर दिया है।

संघ जानता है कि समय से पहले इस मुद्दे को उठाने से मुद्दे की हवा निकल जायेगी और चुनावी गणित गड़बड़ा जायेगा। प्रवीण तोगड़िया भी इस वास्तविकता को जानते हैं और इसीलिए वह अनशन पर अड़े हैं। तोगडिया के ऐलान के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेताओं ने विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व कार्यावहक अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया को समझाने का प्रयास विफल रहा। तोगड़िया ने 17 अप्रैल मंगलवार से अपने प्रस्तावित अनिश्चितकालीन अनशन की शुरूआत कर दी है। संघ के गुजरात के प्रांत प्रचारक चिंतन उपाध्याय, प्रांत कार्यवाह यशवंत चैधरी और प्रांत संपर्क प्रमुख हरेश ठक्कर ने सोमवार को तोगड़िया से मुलाकात करके उन्हें मनाने की भरपूर कोशिश की थी। तोगड़िया ने संघ नेताओं से साफ तौर पर कह दिया था कि मैं जिन मुद्दों को लेकर अनशन कर रहा हूं, वे दरअसल संघ के ही मुद्दे हैं। वह उम्मीद करते हैं कि संघ इसमें उनका साथ देगा। तोगड़िया ने कहा कि गत 14 अप्रैल को हुए विहिप के सांगठनिक चुनाव के बाद नए नेतृत्व के साथ उनका कोई मतभेद अथवा मनभेद नहीं है। वह चाहते हैं कि मौजूदा विहिप नेतृत्व भी उनकी तरह अयोध्या में राम मंदिर निमार्ण की मांग समेत हिन्दुत्व से जुड़े अन्य मुद्दों पर या तो उनके साथ यहां अनशन में जुड़े या अलग से नई दिल्ली में विहिप कार्यालय में अनशन करे।

दरअसल तोगडिया मोदी और संघ का खेल बिगाडने के लिए ही समय से पहले इस मुद्दे को उठाकर संघ और मोदी की नीयत पर सवाल खडे करवाकर उनका 2019 का खेल बिगाडने में सहायक बनना चाहते हैं। मोदी और तोगडिया की आपसी तकरार को सभी लोग जानते हैं। तोगडिया मोदी के मुख्यमंत्री रहते से ही उन पर हमले करते रहे हैं। अब उन्होंने अपनी हार के बाद खुलकर मोर्चा खोल दिया है।