बाप्सा ने केन्द्रीय गुजरात विश्वविद्यालय में मनाया फुले-अम्बेडकर सप्ताह

आईएनएन भारत डेस्क
अहमदाबादः बिरसा अम्बेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बाप्सा) द्वारा गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘फुले-अम्बेडकर सप्ताह’ का आयोजन 9 अप्रैल से लेकर 14 अप्रैल तक विभिन्न चरणों में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 9 अप्रैल को सामाजिक न्याय की परिकल्पना को लेकर एक खुली चर्चा की गयी। जिसमें गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय से ही आमंत्रित वक्ताओं में प्रोफेसर जयप्रकाश प्रधान, डॉ. बेरिल आनंद, डॉ. होकिप खायिखोलेंन, डॉ. रजनीश गुप्ता एवं श्री शुजाउद्दीन शुजा ने अपने अपने विचार रखें। इसकी अगली कड़ी में 10 अप्रैल को प्रख्यात मानवाधिकारी, अधिवक्ता व नवसर्जन ट्रस्ट की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मंजुला प्रदीप प्रमुख वक्ता थीं, जिन्होंने अपने कार्यों तथा प्राप्त अनुभवों द्वारा बाबासाहब अम्बेडकर के विचारों पर हुए आन्दोलनों से महिलाओं पर पड़े प्रभावों पर अपनी बात रखी। वहीँ 11 अप्रैल को मुंबई विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रमेश काम्बले ने वर्तमान समय में महात्मा ज्योतिराव फुले की रचनाओं की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया।

परन्तु 12 अप्रैल को गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में वार्षिक सम्मेलन होने के कारण बिरसा अम्बेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बाप्सा) की अध्यक्ष बिरेन्द्री ने ‘फुले-अम्बेडकर सप्ताह’ के इस दिन के कार्यक्रम को एक दिन के लिए स्थगित रखा।

13 अप्रैल को नेशनल पीस ग्रुप’ द्वरा सामाजिक न्याय को लेकर गीतों का आयोजन किया गया। जिसमें समाज के अनेकों मुद्दों पर गीतों के माध्यम से समाज में व्याप्त तमाम बुराइयों पर प्रकाश डाला गया। रोहित वेमुला के जीवन पर आधारित नाटक का आयोजन 14 अप्रैल को “व्हिस्टलब्लोअर थिएटर ग्रुप” के द्वारा “मैं घास हूँ” नाम से किया गया जिसमें उन तमाम मुद्दों पर प्रकाश डाला गया जिसमें एक वंचित तबके से आने वाले छात्रों को ब्राह्मणवादी, सामंतवादी, पूंजीवादी व्यवस्था का हमेशा सामना करना पड़ता है। यह थिएटर कार्यक्रम दलित छात्र रोहित वेमुला के लेखन पर आधारित था। 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय में रोहित वेमूला की संस्थानिक हत्या हुई थी। इस नाट्य मंच के द्वारा विद्यार्थी समाज में होने वाले उन तमाम पहलुओं पर फोकस किया गया। जिसमें वंचित तबके के लोगों को किस प्रकार से उच्च शिक्षा से दूर रखने का प्रयास किया जाता है।

हालांकि 13 अप्रैल को कुछ बाहरी असामाजिक तत्वों द्वारा कार्यक्रम में बाधा पहुंचाने की हर संभव कोशिश की गयी। जिसको लेकर छात्रों में बहुत ज्यादा आक्रोश था।

इस घटना को लेकर सीयूजी, बाप्सा की अध्यक्ष बिरेन्द्री ने इसे लोकतंत्र पर एक हमला बताया। इसके साथ ही बिरेन्द्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन, स्टूडेंट काउंसिल तथा छात्रों का आभार प्रकट किया और कहा कि इन लोगों के सहयोग के बिना सफलतापूर्वक कार्यक्रम कराना संभव नहीं था।