मासूम आशिफा और उन्नाव की बेटी पर क्यों खामोश हैं राष्ट्रवादी आवाजें

आईएनएन भारत डेस्क
कठुआ की आसिफा और उन्नाव की बलात्कार पीड़िता न्याय के लिए गुहार लगा रही हैं और देशभर में उनके गुनहगारों और बेशर्मी से उनके बचाव में खड़े लोग चर्चाओं में हैं। परंतु इस बीच में ऐसी कईं राष्ट्रवादी और औरतों की हिमायती आवाजें आज खामोश हैं, जो 2014 के चुनावों से पहले सबसे बुलंद और मुखर थी। वह आवाजें कठुआ में बलात्कार के बाद बेहरमी से कत्ल कर दी गई आठ साल की आशिफा और उन्नाव की बलात्कार के पिता को बर्बरता की तमाम हदें पार करके मार दिया गया और 2014 से पहले चीख चीखकर महिला सुरक्षा की बाते करने वाली आवाजें खामोश हैं। ना केवल खामोश हैं बल्कि उनके लोग तिरंगा लेकर भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारों के साथ सड़कों पर है। मालूम नही कि यह कौन सी राजनीति है जो तिरंगे अपमान और भारत माता के मान को तार तार करने पर अमादा है।

निर्भया काण्ड़ के बाद विरोध प्रदर्शनों के लिए सड़कों पर उतरे ना बाबा रामदेव का कहीं पता है और ना ही जनरल वी के सिंह के फौजी तेवर दिखाई और सुनाई पड़ते हैं। बाबा तो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारी हो गये और जनरल के फौजी तेवर को लगता है कि कुर्सी की दीमक चाट गई।

कभी अपने बागी तेवरों और बेबाकी के लिए मशहूर रही किरण बेदी भी पुडुचेरी के उप राज्यपाल की कुर्सी संभालने के बाद वहां की कांग्रेस सरकार के लिए रूकावटें पैदा करने में इतनी लीन हो गयी हैं कि उन्हें देश में महिलाओं की सुरक्षा का भी ख्याल नही रहा है। उन्होंने उस दौर में रोजाना बयानबाजी की और सोशल मीड़िया से लेकर अखबारी दुनिया तक महिला सुरक्षा पर मुखर रही। दखिए उनका टिवटर पर बयानः

KIRAN BEDI, activist — Let this sacrifice day b called NIRBHAY DAY where all cops led by their seniors RESOLVE that no complaint from any woman will go unattended!

देश की मौजूदा विदेश मंत्री और 2014 से पहले नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज भी बलात्कार के दोषियों को फांसी पर लटकाने को लेकर संसद में काफी मुखर थी। परंतु अब कठुआ से लेकर उन्नाव तक की घटनाओं पर उनकी खामोशी भी खासी दिलचस्प है। देखिए उनका भी बयानः

SUSHMA SWARAJ, senior BJP leader — Her death has shaken the conscience of the nation. We must wake up and make India safe for daughters.

इस बयान बाजी में देश के मौजूदा प्रधानमंत्री भी पीछे नही थे। वह दीगर बात है कि वह अब ना टिवट कर रहे हैं और ना ही जुमलेबाजी।

NARENDRA MODI , Gujarat chief minister — Deeply saddened & distressed by the news of India’s braveheart daughter passing away. My deepest condolences with her family.

सनातनी अभिनेता अनुपम खेर उस समय बोलने वालों में सबसे मुखर नही बल्कि सबसे वाचाल सिद्ध हो रहे थे तो अब चुप रहने में भी कीर्तिमान बनाने की तरफ हैं। लगता है कि तब देश की बेटियां उनकी बेटियां थी और अब सभी बलात्कार पीडिताएं विदेशी हैं। अब किसी को किसी से माफी मांगने की जरूरत नही जो हो रहा है सब ठीक है।

ANUPAM KHER , actor — This is NOT the time to shut down Metros, India Gate or India. This is the time to Apologise,Say SORRY for letting People down.

सबसे कमाल सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सुपुत्र का है। अभिषेक को तो कोई सत्ता भी नही मिली है, मगर वह क्यों चुप है। पिता की हिदायत या साहेब का खौफ है।

ABHISHEK BACHCHAN, actor — This is not the country I grew up in as a child, this is not the country I want my daughter to know whilst she grows up!

इसके अलावा भी किरन खेर, मीनाक्षी लेखी, सुमित्रा महाजन, स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद सरीखें लोगों की एक लंबी सूची है जो खामोश ही नही बल्कि अपने घरों में चैन की नींद सो रहे या हो सकता हो कि बलात्कारियों को बचाने की योजनाओं में व्यस्त हों।

हमेशा लड़ने के अंदाज में टीवी पर दिखाई देने वाले रविशंकर प्रसाद ने निर्भया मामले में न्याय की गुहार से भी आगे सक्रियता दिखाई थी और निर्भया के अंतिम संस्कार पर भी उंगली उठाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश कर दी थी। उन्होंने कहा था कि जल्दबाजी में किया गया अंतिम संस्कार सवाल खड़े करता है। लेकिन यूपी सरकार का सेंगर को बचाना कोई सवाल नही खड़े करता है और जम्मू में बलात्कारियों के पक्ष में उनके मंत्रियों का सड़क पर उतर आना तो उनकी पार्टी के संस्कारों को संवृद्धित करने वाला हो शायद?