दलित की निकली बारात तो समझौते के बाद भी टूटेगा ठाकुरशाही का कहर

आईएनएन भारत डेस्क
पिछले दिनों सुर्खियों में रहा यूपी के कासगंज में दलित युवक के बारात निकालने का मामला फिर से चर्चा में है। इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश के बाद समझौता तो हो गया था मगर ठाकुर परिवारों की धमकियां और उनकी ठाकुरशाही अब फिर से नये रूप में सामने आ रही हैं। निजामपुर गांव में रह रहे लड़की के परिवार और अन्य दलित परिवार आरोप लगा रहे हैं कि ठाकुर परिवारों ने बारात वाला विवाद शुरू होने के वक्त से ही उनके खेतों में पानी देने से इनकार कर दिया था।

दुल्हन के परिवार के लोग कह रहे हैं कि प्रशासन के दबाव में ठाकुर बारात के लिए मान तो गए हैं लेकिन उनके द्वारा दी जा रही धमकियां रूकने का नाम नही ले रही हैं। ठाकुर पक्ष के लोग साफ कह रहे हैं कि पुलिस सुरक्षा हट जाने के बाद दुल्हन का परिवार और बाकी एससी गांव में कैसे रहेंगे।

दलितों को ठाकुर सिंचाई के लिए पानी नही दे रहे हैं गांव के ही दलित परिवारों का कहना है कि बारात निकालने की जिद पर अड़ने के बाद से ही ठाकुरों ने साफ कह दिया था कि या तो बारात निकाल लो या फिर सिंचाई के लिए पानी ले लो। उसी के बाद से ही खेतों में पानी रोक दिया गया और सभी परिवारों की फसल खराब हो गई है।

बताया जाता है कि मामले में समझौता हो जाने के बाद भी निजामपुर गांव में तनाव बना हुआ है। लड़की के भाई बिट्टू को भी जान से मारने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा के लिए गनर दिया गया है और बाकी परिवार को भी सुरक्षा दी गई है।

हाथरस के संजय जाटव की शादी कासगंज के निजामपुर में रहने वाली शीतल से हो रही है। संजय जाटव गांव में ठाकुरों के इलाके से बारात निकालना चाहता था जबकि उस गांव में आज तक किसी दलित की बारात ठाकुरों के इलाके से होकर नहीं निकली। ऐसे में संजय हाई कोर्ट गया। हाई कोर्ट ने उसकी याचिका का निपटारा करते हुए पुलिस प्रशासन से मामले को निपटाने का आदेश दिया था। पुलिस ने ठाकुरों और दलितों में समझौता कराया और दलित को ठाकुरों के इलाके के कुछ हिस्से से सशर्त बारात ले जाने की अनुमति दे दी थी।