भागलपुर दंगे के आरोपी केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे को मिली जमानत

आईएनएन भारत डेस्क
बिहार. भागलपुर दंगे के आरोप में जेल भेजा गया केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनीचौबे के बेटे अर्जित चौबे, सहित उसके आठ सह आरोपियों को जिला सत्र न्यायधीश कुमुद रंजन ने जमानत दे दी। जमानत मिलने के तुरंत बाद जेल में बंद आरोपी अर्जित चौबे के फेसबुक पर तस्वीरों के साथ एक पोस्ट ने सब को चौका दिया। इस पोस्ट में अर्जित ने लिखा, “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। चाहे हाथों में डालो हथकड़ी या पैरों में जंजीर फिर भी बोलता रहूंगा जय श्रीराम।”

 

विपक्षी नेताओं का मानना है कि राज्य सरकार की सहयोगी पार्टी के नेता का बेटा मालूम नही किस सत्य की बात कर रहा है। कोर्ट से वारंट होने के बावजूद भी जिस राज्य पुलिस की हिम्मत नही हुई कि उसे गिरफ्तार कर सके क्या वह पुलिस हथकड़ी या बेडी पहना सकती है। लोग सवाल खड़े कर रहे हैं कि यदि अर्जित चौबे भाजपा के ब्राहमण मंत्री का बेटा नही होता तो उसे कितने दिनों तक जेल में रहना पड़ता। उप्र. के सहारनपुर के चन्द्रशेखर रावण का उदाहरण सबके सामने है और 2 अप्रैल के भारत बंद में जिस प्रकार कई जगह भाजपा सरकारें दलितों पर रासुका और 307 के मुकदमें लाद रहीं हैं तो उससे भाजपा सरकार की नीयत और उसके दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक विरोधी होने पर कोई शक की गुंजाइश नही रह जाती है।

 

खबरों के मुताबिक एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि जमानत सशर्त मंजूर की गई है। जबकि कोर्ट ने आरोपी पर 30 दिन तक किसी भी प्रकार का जुलुस और नारेबाजी करने पर पाबंदी लगाई है.

 

आपको बता दे कि जमानत कि अर्जी आरोपियों ने शुक्रवार को लगाई थी और पुलिस ने यदि केस डायरी सही समय पर करा दी होती तो मंत्री के बेटे को शनिवार को ही जमानत मिल जाती।

 

अर्जित चौबे पर बगैर इजाजत के शोभा यात्रा निकालने और भड़काऊ भाषण देकर सांप्रदायिक माहौल खराब करने जैसे गंभीर आरोप थे। जिसके परिणामस्वरूप बिहार में जगह जगह दंगे हुए और पूरे सूबे की शान्ति और भाईचारा दांव पर लग गया।