दलित, आदिवासियों व अल्पसंख्यको की रक्षा के लिए भाकपा का ज्ञापन

Byरणधीर सिंह सुमन
बाराबंकीः 2 अप्रैल को दलितों द्वारा आयोजित भारत बंद के दौरान सरकार व संघी गुंडों ने 12 दलितों की निर्मम हत्या कर दी थी। देश में कई हजार दलित नौजवानो को थानो में ले जाकर पिटाई की गयी और रासुका जैसी कार्यवाही कर उनका भविष्य बिगाड़ने की कोशिश की गयी है। उक्त विचार गाँधी भवन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला कौंसिल के विरोध प्रदर्शन में पार्टी राज्य परिषद् सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की मंशा है कि दलित, आदिवासियों व अल्पसंख्यको का नरसंहार कर उनकी सम्पदा को छीनकर कार्पोरेट सेक्टर के अपने मित्रो को सौंप दिया जाये। धरने को जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि योगी सरकार हर मुद्दे पर फेल हो चुकी है और विद्युत विभाग को निजी घरानों के हाथ बेच रही है। जिसका पार्टी विरोध करती है। पार्टी सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि सरकार के कारिंदे पत्रकारों को फर्जी मुकदमो में फसाकर दमन कर रही है। जिसका भुक्तभोगी पत्रकार डीके गोस्वामी है।

धरने को संबोधित करते हुए पार्टी जिला सह सचिव डॉ कौसर हुसैन ने कहा कि इस सरकार की नीतियों के कारण आवारा साण्ड़ों व बंदरो की संख्या बढ़ गयी है। जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। अंत में महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित 8 सूत्रीय मांगो वाला ज्ञापन जिला प्रशासन को सौपा गया। जिसमे 2 अप्रैल की घटना की जाँच करवाकर दोषियों को दण्डित किये जाने, दलित नेताओ पर की गयी रासुका जैसी कार्यवाही को वापस लिए जाने, निजी घरानों को बेचे गए विद्युत विभाग के फैसले को वापस लिए जाने, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह के भ्रष्टाचार व पत्रकार डीके गोस्वामी के मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट भेजे जाने, आवारा सांडो को गौरक्षक संगठनों को सौपे जाने, क्रय केन्द्रों को खोले जाने, किसानों के बकाया बिजली बिलों को माफ किए जाने व आये दिन हो रही अपराधिक घटनाओ में अपनी नाकामी छुपाने के लिए फर्जी घटनाओ के खोले जाने पर रोक लगाये जाने की मांग की गयी है।

धरने की अध्यक्षता गोपी कुमार व संचालन विनय कुमार सिंह ने किया। प्रदर्शन में मुख्य रूप से मुनेश्वर बक्श, प्रवीन कुमार, रामनरेश वर्मा, गिरीश चन्द्र, कर्मवीर सिंह, वीरेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार, भगवन राम सिंह, चाँद बाबु, मानवेन्द्र वर्मा, सियाराम, अशोक वर्मा, रामसनेही, बाबूलाल, गयाप्रसाद, छोटेलाल, अमित, अवधेश यादव आदि प्रमुख रहे।