Movie review: ब्लैकमेल: इरफान खान से ब्लैकमेल होना काफी मनोरंजक है

Reviewer: Smriti Mala
फिल्म : ब्लैकमेल
निर्देशक: अभिनय देव
लेखक:  परवेज शेख, प्रदुमन सिंह
अभिनय: इरफान खान, कृति कुल्हारी, दिव्या दत्ता, अरुणोदय सिंह, ओमी वैद्य
संगीत:   मिक्की  मैकलयेरी, पार्थ पारेख
रनिंग टाइम: 2 घंटे 19 मिनट
शैली: डारक कॉमेडी, ड्रामा

अपनी पत्नी को पराए मर्द के साथ देखकर उसको मारने और गुस्साने की बजाए एक आम आदमी के पैसे की तंगी और जद्दोजहद से निकलने के लिए अपनी पत्नी के प्रेमी को ब्लैकमेल करते हुए देखना मनोरंजक लगती है। अभिनय देव इससे देल्ली बेली बना चुके हैं जिसका थीम लगभग ब्लैकमेल के जैसा ही था। इस फिल्म में बहुत बार देल्ली बेली की झलक दिखाई पड़ती है।

कहानी: देव (इरफ़ान ख़ान) टॉयलेट पेपर सेल्समेन है, जो अपनी नीरस शादीशुदा जिंदगी में थोड़ा रस भरने के लिए एक दिन ऑफिस से पहले घर जाकर अपनी पत्नी रीना (कृति कुल्हारी) को सरप्राइज देना चाहते हैं। परंतु घर पहुंचकर उनके ही रोमांटिक मूड को सरप्राइज मिल जाता है, जब वह अपनी पत्नी को  गैर मर्द रंजीत के साथ देखते हैं। वो ना तो अपनी पत्नी को मारते हैं, और ना ही उसके प्रेमी को मारते हैं। बल्कि तीसरा रास्ता अपनाकर  वह अपनी पत्नी के प्रेमी रंजीत को ब्लैकमेल करने का सोचते हैं, और उन पैसों से अपना घर और कार का लोन चुकाना चाहते हैं। ब्लैक मेलिंग का सिलसिला यहां शुरू होता है और चलता ही जाता है। देव अपनी पत्नी के प्रेमी  रंजीत को ब्लैकमेल करते हैं। रंजीत रीना को ब्लैकमेल करता है। देव के दोस्त की गर्लफ्रेंड देव को ब्लैकमेल करती है। इन सबके बीच मर्डर हो जाता है। सब एक दूसरे को ब्लैकमेल करने और पैसे लेने में ही लगे रहते हैं।

समीक्षा: कहानी वैसे तो थोडी नयी, मजेदार और ट्वीस्टेड है, लेकिन कुछ चीजें हैं जिसका लॉजिक समझ नहीं आता जैसे उनकी शादीशुदा जिंदगी इतनी निराश क्यों है और ब्लैकमेलिंग के लिए जब इरफान खान पैसे मांगते हैं तो सिर्फ एक लाख क्यों मांगते हैं। फिल्म के  संवाद बहुत ही नेचुरल है। इरफान खान के संवाद कम है, लेकिन उसके बावजूद वह तो अपनी आंखों से सब कह देते हैं।

अभिनय: इरफान खान का अभिनय हमेशा की तरह बहुत ही बेहतरीन है। एक उम्दा अभिनेता है,  जिस का परिचय एक बार फिर इस फिल्म में दिया है। कीर्ति कुल्हारी का किरदार छोटा है, लेकिन अपने बेवफा पत्नी के रोल को बहुत ही बखूबी निभाया है। अरुणोदय सिंह इस फिल्म में थोड़ी एक्टिंग करते नजर आते हैं। बाकी कलाकारों ने भी अपना रोल बखूबी निभाया है।

संगीत:  फिल्म का संगीत सुनने लायक है। “हैप्पी हैप्पी”  दर्शकों के मोड को हैप्पी कर देता है। वही “पटोला” सॉन्ग के डांस करने का मन करता है और “बेवफा ब्युटी” में उर्मिला मातोंडकर  को बहुत सालों बाद पर्दे पर देखकर मज़ा आता है।

सकारात्मक पक्ष: कहानी, अभिनय, गाने

नकारात्मक पक्ष: स्क्रीन प्ले

निष्कर्ष: फिल्म मनोरंजक हास्यास्पद है जिसे कम से कम एक बार तो जरूर देखना चाहिए।

रेटिंग: 2.5/ 5