प्रकाश करात और पी विजयन का कांग्रेस विरोध करेगा भाजपा की कुर्सी सुरक्षित

आईएनएन भारत डेस्क
माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात की तर्ज पर केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी कहा है कि कांग्रेस के साथ कोई गठजोड़ नही होगा। दरअसल, माकपा का एक हिस्सा एक खास तरह के गैर कांग्रेसवाद का शिकार है और यह कांग्रेसवाद किस तरह से भाजपा के लिए संजीवनी बन सकता है, इसका उदाहरण केरल के पलक्काड़ की नगर निगम है। पलक्काड़ की यह इकलोती ऐसी निगम है जिस पर भाजपा का कब्जा है।

 

बावजूद इसके कि भाजपा के पास बहुमत नही था पलक्काड़ की नगर निगम की चैयरपर्सन भाजपा की प्रमिला शशिधरन बनी। पलक्काड़ नगर निगम में 52 सीटें हैं और बहुमत के लिए 27 सीटों की जरूरत है। भाजपा निगम में केवल 24 सीटें ही जीत पाई। परंतु फिर भी भाजपा की उम्मीदवार 2015 में निगम की चैयरपर्सन बन बैठी। केवल माकपाई जिद के कारण और यही अडियलपन प्रकाश करात और पी विजयन का खेमा देश की राजनीति में दिखाना चाह रहा है। जबकि देशभर के वामपंथी कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं की राय इससे एकदम अलग है।

 

दरअसल पलक्काड नगर निगम में 2015 में भाजपा को 24 सीटें मिली और यूडीएफ को 17 और एलडीएफ को नौ सीटें हासिल हुई और एक एक सीट वेलफेयर पार्टी और आजाद उम्मीदवार ने जीती। भाजपा, यूडीएफ और एलडीएफ तीनों ने चैयरमेन पद के लिए अपने अपने उम्मीदवार खड़े किये जिसमें भाजपा को 24 वोट और यूडीएफ का 18 वोट एवं एलडीएफ को 10 वोट हासिल हुए। इस प्रकार हमेशा की तरह वोट बंअवारे के कारण भाजपा पलक्काड की सत्ता में काबिज हो गई।

 

यदि यूडीएफ और एलडीएफ मिलकर लड़ते और बारी बारी से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद बांटने का फार्मूला बनाते तो पलक्काड़ नबर निगम की तस्वीर दूसरी होती। अब संघ प्रमुख पलक्काड़ जाते हैं वहां के स्कूल आदि के सरकारी कार्यक्रम में शामिल होकर ब्राहमणवादी भगवा आतंक का बिगुल फंूकते हैं और एलडीएफ के विजयन और प्रकाश इस फैलते आतंक पर कबूतर की तरह आंख बंद करके बिल्ली के गायब रहने का अलाप लेते हुए देशभर में इसी वोट बांटने के गीत को गाते घूमते रहते हैं।

 

यहां तक कहा जाता है कि स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व ने यूडीएफ और एलडीएफ के बीच कोई बात नही बनते देख वाम नेताओं से दोनों पक्षों के समर्थन किसी स्वतंत्र उम्मीदवार को अध्यक्ष बनाने की बात भी की थी। परंतु वाम नेतृत्व ने उसे भी नकार दिया।

 

अब इसी फार्मूले पर चलकर माकपा के क्रान्तिकारी खेमे के नेता प्रकाश करात और पूर्व में केरल सरकार में हुए एक घोटाले को लेकर सीबीआई जांच के दायरे में रहे पी विजयन फिर से गैर कांग्रेसवाद का आत्मघाती गीत गाते हुए केरल के पलक्काड माॅडल को देशभर में थोपने चले हैं। उनकी असली मंशा और उसके पीछे के कारणों को प्रकाश करात और पी विजयन ही बता सकते हैं। वैसे यह बात दीगर है कि सीबीआई नामक तोते के हद से ज्यादा इस्तेमाल के आरोपों को भेल रही भाजपा के सत्ता में रहते हुए भी अभी विजयन की जांच वाला मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, जिसमें सीबीआई की तरफ से तुषार मेहता वकील हैं और प्रकाश के साढू प्रणव राय और उनकी कंपनी पर एकबार छापेमारी के बाद सीबीआई और ईडी दोनों खामोश हैं।