घोडे की सवारी पर दलित नौजवान की हत्या, रामराज्य की तरफ बढ़े देश के कदम

आईएनएन भारत डेस्क
भारतीय ब्राहमणवाद अपनी क्रूरता और वहशीपन के चरम पर है। संघ और भाजपा के सत्ता में आने के बाद से तो मानो इस ब्राहमणवादी आतंक ने दरिंदगी की सारे हदें पार करने की ही ठान ली है। इस ब्राहमणवादी पाशविकता का नया नजारा भाजपा शासित गुजरात में फिर से देखने को मिला है। भावनगर के दलित नौजवान प्रदीप राठौर की हत्या दबंग अगड़ों ने केवल इसलिए कर दी कि प्रदीप को घोडे पर चलने का शौक था और गांव के सवर्णो से यह देखा नही गया।

भावनगर की उमराला तहसील के टिम्बी गांव के प्रदीप राठौर की उसी गांव के कुछ अगड़ों ने हत्या कर दी। गुनाह केवल एक घोडा रखना और घोडे की सवारी का शौक। प्रदीप राठौड दो महीने पहले ही यह घोडा खरीदकर लायाा था और उसी समय से उसके कुछ अगड़े गांव वाले उससे धमका रहे थे।

पिछले बृहस्पतिवार की शाम को यह हत्या हुई। प्रदीप राठौड के पिता कालूभाई राठौड का कहना था कि धमकियों के कारण प्रदीप ने घोडे को बेचने का मन बना लिया था परंतु वह ऐसा कर पाता उससे पहले ही उसका कत्ल कर दिया गया।

कालूभाई का कहना है कि प्रदीप शाम को कुछ देर में आने का बोलकर गया था परंतु जब देर रात तक नही आया तो हमें चिंता हुई और हमने उसकी तलाश शुरू की। हमने उसे अपने खेत के पास सड़क पर मृत अवस्था में पड़े पाया। उसके कुछ ही दूरी उसका घोड़ा भी मरा पड़ा था।

दसवी कक्षा के बाद प्रदीप अपने पिता के साथ खेती के काम में लग गया था। प्रदीप राठौड के गांव की आबादी कुल 3 हजार है जिसमें से 10 प्रतिशत दलित हैं। हमेशा की तरह भाजपा शासित राज्य की पुलिस मामले की जांच में लग गई है और प्रदीप के शव को पोस्टमार्टम के लिए भावनगर के सिविल अस्पताल में भेज दिया गया था।