सुशासन नही, दुःशासन बाबू, नीतीश कुमार

कभी वह बिहार के नायक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों में प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार होते थे, परंतु देश की राजनीति के वही सुशासन बाबू आज बिहार के दुःशासन बनकर उभरे हैं। महाभारत के दुःशासन ने भाई के साथ मिलकर सत्ता की खातिर परिवार को बांट दिया था तो बिहार के दुःशासन बाबू ने सत्ता की खातिर अपने सूबे की जनता को ना केवल बांट दिया बल्कि पूरे बिहार को सांप्रदायिकता की आग में झौंक दिया है। बिहार दंगों में जल रहा है, फसादों में टूट रहा है और दुःशासन बाबू खामोश हैं, सहयोगियों के साथ खुश हैं, आनन्द विभोर हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के झूठ की कीमत से सांप्रदायिकता की आग में झूलसता बिहार खरीदा है।

देश के हर आदमी को भ्रष्टाचार से समझौता नही करने वाली उनकी डींगे याद हैं। पूरा देश इस तथ्य का साक्षी है कि किस प्रकार दुःशासन बाबू ने कुटिल तरीके से संघ परिवार के साथ मिलकर भगवा ब्राहमणवाद से समझौता नही करने वाले बिहार के एक लड़ाकू परिवार को फंसाया और पूरा देश देख रहा है कि दंगे के आरोपी और वारंट हो चुके सहयोगी भाजपा के एक मंत्री के बेटे को वह किस प्रकार बचा रहे हैं। पूरा देश दंगा भड़काते उक्त मंत्री के बेटे की तस्वीरे देख रहा है और कानून को धता बताने वाले बाप बेटे के बयान सुन रहा है। और कमाल के दुःशासन बाबू खमोश हैं, चुप्पी साधे हैं।

औरंगाबाद, भागलपुर, मुंगेर और समस्तीपुर दंगे की आगे में जल रहे हैं। भागलपुर में दंगा भड़काने की यात्रा का नेतृत्व करने वाला खुला घूम रहा है और बिहार पुलिस हाथ में वारंट लिये कह रही है कि आरोपी मिल नही रहा है। इससे बड़ा झूठ का तमाशा बिहार और देश की जनता ने कभी देखा नही होगा। परंतु पुलिस की तरह दुःशासन बाबू को भी अपने सहयोगी दल के केन्द्रीय मंत्री का बेटा फरार ही नजर आ रहा है। शायद दुःशासन बाबू के शब्दकोश में इसे झूठ, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक बेइमानी की श्रेणी में नही गिना जाता होगा बल्कि वह इसे सत्ता बचाये रखने का नैतिक दायित्व ही मानते होंगे। जब से भाजपा से उनका बिहार में गठजोड़ बना है सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का यह खेल अपने चरम पर है और दुःशासन बाबू हैं कि सब कुछ नियंत्रण का राग छोड़ ही नही रहे हैं। एक के बाद दूसरे शहरों तक सांप्रदायिकता की आग फैल रही है परंतु मुख्यमंत्री कहते हैं कि विपक्ष झूठ बोल रहा है, अफवाह फैला रहा है। भगवा गिरोह के लोग एक शहर में दूसरे समुदाय के धर्म स्थल को ध्वस्त कर उस पर भगवा फहराते हैं और जय श्रीराम का नारा लगाते हैं, दुकानों घरो को जालाया जाता है। फिर भी दुःशासन बाबू सब दुरूस्त है कहते नही अघाते। यह कैसा प्रशासन, यह कैसा नियंत्रण, यह कैसी लाचार शान्ति सुशासन बाबू जिसने आपको दुःशासन बनाकर रख दिया। शायद बहुजनों की कुबार्नी देकर हिन्दू राष्ट्र बनवाने की आपकी कोई डील आतंकी ब्राहमणवाद के साथ है, जिसने आपको तथाकथित सुशासन से दुःशासन बना दिया है, दुःशासन बाबू।