एससी/एसटी कानून में सुप्रीम कोर्ट के बदलाव पर विपक्ष खफा, भाजपा, संघ खामोश

आईएन एन भारत डेस्क:
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जब से एक वाद के सुनवाई में SC/ST के प्रावधान के संबंध में जब से बदलाव किए हैं। तभी से राजनीतिक हलकों में हलचल मच हुआ हैं। सरकार में सामिल एससी/एसटी नेता ही नहीं, विपक्षी दलों और क्षेत्रीय दलों के नेता, विधायक और सांसद भी SC/ST एक्ट में बदलाव के ख़िलाफ़ विरोध होना शुरु हो गया हैं। NDA के SC और ST सांसद प्रधानमंत्री से मिले एवं एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ कदम उठाने की मांग की।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी SC/ST एक्ट में बदलाव के ख़िलाफ़ राष्ट्रपति से मिलने पहुंच गए। साफ है कि इस एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जो परिवर्तन हुआ है उसने एक नई राजनीति का दरवाज़ा खोल दिया है। राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा “सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला ऐसे समय में आया है जब दलितों और आदिवासियों के खिलाफ देश भर में अत्याचार के मामले बढ़ते जा रहे हैं।”

साफ़ हैं कि कांग्रेस , बीजेपी ही नही अन्य क्षेत्रीय पार्टीयों पर भी इस मुद्दे का दबाव है इसीलिए प्रधानमंत्री से मिलने वाले एनडीए सांसदों में सरकार के मंत्री भी शामिल थे। सबने एक सुर में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसले से एससी/एसटी एक्ट कमजोर हुआ है और इस पर पुनर्विचार याचिका दायर होनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री व लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के नेतृत्व में  NDA के सांसदो की अगुआई में प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा , “हमने इस कानून में बदलाव को निरस्त कराने की मांग की है। यह कानून हम 1989 में लाए थे। हम इसे कमजोर नहीं होने देंगे।”

मीडिया में आ रही खबरों के माने तो रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की हैं। याचिका में कहा गया हैं कि मामले को बड़ी पीठ के समक्ष भेजा जाए और इस मामले में उन्हें भी पार्टी बनाया जाए।

बात दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते एक आदेश में एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों में ढील दी थी। इसमें गिरफ्तारी से पहले सीनियर पुलिस अधिकारी द्वारा जांच कराए जाने और सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए उसकी नियुक्ति करने वाले अफसर की अनुमति ज़रूरी है।

विपक्ष ने केंद्र सरकार को निसान बनाते हुए कहा कि सरकार ने कोर्ट में सही तरह से कानून की पैरवी नहीं की। उसने सरकार पर अगड़ी मानसिकता से ग्रस्त होने का आरोप भी लगाया। सरकार पर वोट बैंक के कारण राजनीतिक दबाव है। बस वह इस कोशिश में है कि अगर पुनर्विचार याचिका दायर हो तो उसका राजनीतिक लाभ विपक्ष को न मिल जाए। अपने सांसदों और मंत्रियों की ये मांग उसका रास्ता कुछ साफ ही करती है। क्योंकि देश मे SC/ST की जनसंख्या लगभग 30% हैं।