जलते बिहार को आज फिर से लालू जैसे नेता की जरूरत है

By अमित कुमार

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को सांप्रदायिक शक्तियों ने गिराकर पुरे विश्व में भारत को कलंकित किया। देश के सांप्रदायिक सद्भाव को ठेस पहुंचायी, तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री  लालू यादव ने आकशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से राज्य में अमन चैन और सामाजिक सौहार्द को कायम रखने की अपील की थी, यह बहुत ही ऐताहिसक अपील थी। इस अपील से लालू जी की सेकुलरिज्म और सामाजिक न्याय की राजनीति की दूरदर्शिता जिसने बिहार को सांप्रदायिक आग से बहार निकाला था को दर्शाता है-

बिहारवासी भाइयो एवं बहनों,

आप सभी जानते है की हजारो वर्षो की गुलामी को काटने के लिए हमारे नेताओ ने हमारे पुरखो ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, बाबा साहेब आंबेडकर, डॉक्टर राम मनोहर लोहिया, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, युसूफ मैहर अली और देश की जनता चाहे कश्मीर की हो या कन्याकुमारी की, सभी जाति, सभी धर्मो के लोगो ने भारत को आजाद कराने के लिए बड़ी भारी कुर्बानी देने का काम किया था और आपसी एकता और हमारे पुरखो की कुर्बानी की वजह से देश आजाद हुआ।

अपने संविधान में जो पिछड़े भाई हैं, दबे कुचले लोग हैं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोग हैं उनके लिए व्यवस्था की थी। हमारे पुरखो ने ऐसी व्यवस्था की थी जो इनको विशेष अवसर देंगी, आरक्षण की व्यवस्था दी थी। ये देश आपका देश है, सभी का देश है, यह धर्मनिरपेक्ष देश है, अलग भाषा अलग बोली, हर मजहब का समान आदर किया जायेगा। लेकिन 45 साल की आजादी में और हमारी कुर्बानी को हमारे पुरखो की कुर्बानी को इस देश में भाजपा आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद ने राम और रहीम का बखेड़ा उठाकर धर्म की राजनीति से जोड़कर, अयोध्या में जो करोड़ांे लोगों की आस्था का प्रतीक था, बाबरी मस्जिद उसे ढाहने का काम किया। इससे न केवल करोड़ों अकलियत के लोगों की धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करने वाले लोगों के ही नहीं पूरे राष्ट्र की धर्मनिरपेक्ष जनता के मन में दुःख और शोक, भय की लहर फैल गई। हम भारत के लोग दुनिया में कोई उत्तर देने की स्थिति में नहीं हैं।

बाबरी मस्जिद पर किया गया प्रहार देश की लोकतंत्र एवं धर्मनिरपेक्षता पर किया गया क्रूर प्रहार है। हम सभी मर्माहत है और हम कभी भी इसे चुपचाप देखते नहीं रह सकते। भारत की जनता में वह ताकत है, जिनसे बेमिसाल ताकत वाली बर्तानवी हुकूमत को यहाँ से उखाड़ फेंका। हम इस मामले को देश की अमन पसंद जनता की अदालत में ले जा रहे हैं और जिन लोगों ने हमारी उम्मीद पर पानी फेरा है उनके मंसूबों को भी सत्य और अहिंसा के बल पर चकनाचूर कर देंगे।

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने हमें सिखाया था की नफरत का जबाब मुहब्बत से और हिंसा का जबाब अहिंसा से देना चाहिए। मैं आप लोगों को पूरा यकीन दिलाता हूँ कि फिरकापरस्त लोगों को किसी भी कीमत पर और और किसी भी हालत में कामयाब नहीं होने दिया जायेगा। हम अपने सद्भाव और मुहब्बत से जख्म भर देंगे। यह तभी मुमकिन है जब हम सब पूरे सब्र से काम लें और आपसी सदभाव पर कोई आंच नहीं आने दें। मंदिर मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा में हमारे पूरे मुल्क के तहजीबों तमद्दुन की रूह बस्ती है। इनमे किसी को भी कोई नुकसान होता है तो हममे से हर शख्स का जाती नुक्सान होता है।

अयोध्या में हुई घटना से हर हिन्दू, मुस्लिम सिख, ईसाई के दिल पर गहरी चोट पहुंची है। हमारी एकता सबसे बड़ी ताकत है और धर्मनिरपेक्षता पर हुए हमले का मुकाबला हम सब अपनी चट्टानी एकता के बल पर ही करेंगे। बाबरी मस्जिद पर किये गए हमले की हम जोरदार निन्दा करते हैं और इस हमले के लिए ढिलाई बरतने वाली सत्ता के मठाधीशांे को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उसकी पुरजोर मजम्मत करते हैं।

आपसे हमारी अपील है हर गांव, शहर, गली और मोहल्ले खेत और खलिहान में शांति और सद्भावना, दोस्ती और भाईचारे का माहौल बनाये रखें। विशेषकर जो गांव के गंवई लोग है, गरीब और लाचार लोग हैं, अमन पसंद लोग हैं, बुद्धिजीवी भाई हैं, धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करने वाले हैं, उन सभी भाइयो से हम अपील करते है, आज देश ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है की इस देश की रखवाली करना, देश को बचाने की जिम्मेवारी आपके कंधो पर है। आप अफवाहों पर कान न दे हर कदम, हर मोर्चे पर साम्प्रदायिकता को शिकस्त दें, सभी हिन्दू मुस्लिम भाइयों से निवेदन है कि वे धैर्य और सयंम बरतें। उकसावे में न आवें, देश की बहुसंख्यक गरीब और लाचार जनता धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती है और इन्ही ताकतों के द्वारा हम उस जहरीले सांप को जिसने देश को ऐसे मोड़ पर खड़ा किया है, उसके घाव को निकालने का काम करेंगे।

हम बिहार के भाइयो और बहनों से पुरजोर अपील करते हैं कि जहां अपना राज्य भूख , अकाल और सुखाड़ में है वहीं ऐसे हालत पैदा करने के पीछे आप आसानी से समझ सकते हैं। उनकी मंशा गरीबों की भलाई में नहीं है उनकी इच्छा है की हिन्दुत्व फैलाओ, हिन्दू मुस्लिम दंगो कराओ और फिर से दिल्ली की गद्दी पर आसीन हो जाओ यही इसके मन में अरमान है। इनके अरमान को हम सफल नहीं होने देंगे। गरीब जनता से हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई भाई और बहनों से हम अपील करते है कि आज इस देश की रक्षा की जिम्मेवारी विशेषकर बिहार के लोगो के कंधो के ऊपर है। जो भाई भाई में फुट डालनेवाली ताकतें हैं उनको दर किनार करेंगे, यही  हम आप सबसे अपील करते हैं।

बिहार से सद्भावना का सन्देश पुरे देश में फैला। पुरे देश को एकजुट होकर माला में गुथने की जिम्मेवारी आप सभी के कंधो पर है, हम आपसे आपका सहयोग चाहते हैं। सरकार ने हर जगह निगरानी रखी है, हम हर जगह जागरूक है सचेत हैं। शासन को हिदायत दी गयी है कि जहां भी कोई बलवाई हो, चाहे वह किसी धर्म किसी मजहब का मानने वाला हो, उससे सख्ती बरती जाय। दंगा फसाद को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस कार्रवाई में हम लगे हैं, लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेवारी जो गांव के लोग हैं, मोहल्ले के लोग हैं, गरीब लोग हैं, लाचार लोग हैं जिनसे औजार बनवाया जाता है दंगा फसाद कराने के लिए उनसे हमारी अपील है कि इन ताकतों से अलग थलग रहेंगे, कोई भी अफवाह नहीं सुनेगे।

इन्ही शब्दों के साथ हम सभी भाइयो -बहनो को इकठ्ठे नमस्कार, जय हिन्द, आदाब सलाम करके अपनी अपील को अपनी बात को समाप्त करते है।

लालू यादव की इस अपील ने बिहार को दंगे से मुक्त रखा। पूरे देश ने लालू यादव का लोहा माना, आज फिर समाज में साम्प्रदायिकता के आधार पर बंटवारा साफ दिख रहा है, ऐसे में लालू यादव जैसे नेताओ की कमी महसूस हो रही है। इस परिस्थिति में सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाले नौजवान पीढ़ी को लालू यादव से सिखने की जरूरत है।

(अमित कुमार, शोध छात्र, अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली)