भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों से त्रस्त 91 किसानों ने मांगी इच्छा मृत्यु

आईएनएन भारत डेस्क
बुलढाणा (महाराष्ट्र)। साढ़े चार साल से मोदी रेडियों पर मन की बात करते रहे और देश के किसानों की दुर्दशा इस कदर बढ़ी कि किसान मौत मांगने की बात तक पहुंच गये और साहेब को पता ही नही चला। बुलढ़ाणा की यह घटना भाजपा शासित राज्यों में किसानों की बदहाली का पता दे रही है। बुलढ़ाणा के किसानों को और कुछ नही सबसे ज्यादा मोदी सरकार का विकास निगल रहा है। एक तरफ तो बुलढ़ाणा के किसान कर्ज के बोझ और फसलों का उचित मूल्य नही मिलने से त्रस्त थे तो दूसरी तरफ उनके उपर उनकी जमीन के अधिग्रहण की कम कीमत मिलने की मार पड़ गई जिससे त्रस्त होकर महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के 91 किसानों ने इच्छामृत्यु की अनुमति मांग ली है। किसानों ने इसको लेकर राज्य के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव और एसडीएम को पत्र लिखा है।

किसानों की शिकायत है कि उन्हें राज्य सरकार की ओर से ना तो फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है वहीं हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले पर्याप्त मुआवजे का भुगतान भी अभी तक नही किया गया है। किसानों ने बताया कि वे अपने परिवार का पालन-पोषण करने में सक्षम नही हैं। उनकी दुर्दशा ऐसी हताशा में बदल गयी है कि उन्होंने सरकार से इच्छा मृत्यु मांगी है। उनका कहना है कि पहले फसल की लूट फिर कम दाम पर जमीन की लूट और उस पर मुआवजे के नही मिलने ने उनके ऐसे हालात बना दिये हैं कि उनके पास जान देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में ही टर्मिनली इल (असाध्य बीमारी जिसमें शरीर ने काम करना छोड़ दिया है) लोगों के लिए पैसिव यूथनेशिया (इच्छामृत्यु) की मंजूरी दी है।

महाराष्ट्र में किसानों की आर्थिक स्थिति कितनी खराब है यह पिछले दिनों पूरे देश ने देखा जब 35 हजार किसान नासिक से 180 किलोमीटर पैदल चलकर मुम्बई नंगे पांव पहुंचे थे। पूरे देश ने उनके पैरों के छालों और नंगे बदन और नंगे पैरों को देखकर आह भर दी थी। परंतु प्रधानसेवक के मन की बेनतीजा और बेवजह बात पर कोई फर्क शायद नही पड़ा और वह निरंतर विज्ञापन की तरह उंची और उंची होती गई।

अब मन की बात से इतर किसानों के अनेकों संगठनों ने किसानों की दुर्दशा को समझने और उनकी बेहतरी के लिए उनकी समस्याओं पर अविलंब ध्यान देने की मांग उठाई है। किसान एवं सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसानों द्वारा इच्छामृत्यु की मांग सरकार के प्रति उनकी हताशा का एक प्रतिबिम्ब है।

हाल ही में किसानों ने जब विधानसभा के घेराव की चेतावनी दी थी तो किसानों के सख्त और निर्णायक रूख को देखते हुए भाजपा की देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने उनकी अधिकतर मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था। किसानों ने बिना शर्त कर्ज और बिजली बिल माफ करने की मांग की थी।

नरेंद्र मोदी सरकार ने लगातार स्वामीनाथन आयोग और फसल का डेढ गुना अधिक न्यूतम समर्थन मूल्य देने की बात कर रही है परंतु भाजपा शासित महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद बदहाल है।

सोमवार को किसानों नेे इच्छा मृत्यु के पत्र को राज्यपाल को संबोधित करते हुए इसे राजभवन भेजा है। परंतु सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।