झारखंड में भाकपा माले का रंग हुआ ‘‘भगवा‘‘

आईएनएन भारत डेस्क
कभी झारखंड विधानसभा में एक अकेला शख्स हुआ करता था संपूर्ण विपक्ष। नाम था भाकपा माले के महेंद्र सिंह। महेंद्र सिंह की वहीं पार्टी अपने इकलौते विधायक राजकुमार यादव के कारण आज कठघरे में खड़ी है। राज्यसभा चुनाव में राजकुमार ने अपने आचरण से भाजपा को लाभ पहुंचाया है। उन्होंने यूपीए प्रत्याशी धीरज सिंह के साथ-साथ नोटा को भी वोट दिया है।

महेंद्र सिंह के पुत्र और बगोदर से भाकपा माले के विधायक रहे विनोद सिंह ने राज्यसभा चुनाव में कभी भी किसी पार्टी को वोट नहीं दिया, लेकिन राजकुमार यादव ने कुछ दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वे अपना वोट कांग्रेस को देंगे। हालांकि शुक्रवार को हुए राज्यसभा चुनाव में उनका दूसरा रूप ही नजर आया।

मतदान के दौरान राजकुमार ने ऐसी चाल चली कि वे खुद भी बच जाएं और भाजपा को इसकी मदद भी मिल जाए। माले विधायक की चालाकी के कारण, उनका वोट रद्द हो गया और लाभ भाजपा को मिला। राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद कहते हैं  कि यह पार्टी के लिए चिंता और शर्मिंदगी की बात है। पार्टी के अन्य नेताओं ने कहा कि उनके एक विधायक के कार्यकलाप ने आज पूरी पार्टी की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

भाकपा माले विधायक राजकुमार यादव की सोंथालिया से दोस्ती चर्चा में है। एक ही क्षेत्र के होने के नाते सोंथालिया से इनकी विशेष पटती है। राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति थी कि उनके विरोधी खेमे के विधायक भले ही उन्हें वोट न दें, पर वे ऐसा कुछ जरूर करें जिसका लाभ उनके प्रत्याशी को मिले। राजकुमार यादव ने भाजपा की रणनीति के तहत इस प्रकार वोटिंग किया कि उनका वोट रद्द हो गया, जिसका लाभ प्रदीप सोंथालिया को मिला।

पंजाब के मनसा में भाकपा माले का महाधिवेशन चल रहा है। शनिवार दोपहर बाद राजकुमार यादव वहां पहुंचे। देर शाम को उनसे राज्यसभा चुनाव में उनके बारे में पूछा गया। राजकुमार ने कहा कि उनसे चूक हो गई है। उनकी मंशा ऐसी नहीं थी। उधर राज्यसभा चुनाव में दूसरे वामपंथी विधायक मासस के अरूप चटर्जी पर भी सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि उन्होंने क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा को वोट दिया है। हालांकि अरूप ने इसका प्रतिवाद किया है। हालांकि झारखण्ड़ मुक्ति मोर्चा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पांच लाख में वोट बेचा है।