वाजिब हो सकती है लालू यादव की जान के खतरे की तेजस्वी की आशंका

आईएनएन भारत डेस्क
चारा घोटाले के आरोप में राजद प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के खिलाफ सीबीआई वकील जिस प्रकार के तर्क अदालत में दे रहे हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि पूरे मामले का अब राजनीतिकरण हो चुका है।

लालू प्रसाद यादव के वकील ने सुनवाई के दौरान उनके पुराने नहीं अपितु वर्तमान स्वास्थ्य हालात के बारे में कोर्ट को बताया। उन्होंने उनके शुगर लेवल में बढ़ोतरी और क्रिटिनिन में बढ़ोतरी का हवाला देकर बताया कि सही इलाज नही मिलने की स्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री की किडनी पर इसका प्रभाव पड़ सकता है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

लालू प्रसाद यादव के वकील ने कहा कि उनके शरीर में पानी रखने की क्षमता नहीं है जो किड्नी को नुकसान पहुँचा रही है। उन्हें बेहतर ईलाज के लिए दिल्ली के एम्स अस्पताल में भेजा जाना चाहिए। लालू प्रसाद गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे हैं अगर उनके स्वास्थ्य का उचित ख्याल नहीं रखा गया तो गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि यह सब भाजपा शासित झारखंड के सरकारी अस्पताल के सुझाव और रिपोर्ट हैं।

वहीं सीबीआई के वकील के तर्क पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित दिखाई पड़ रहे थे। सीबीआई के वकील ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि लालू स्वस्थ हैं और वे केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर होते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे केन्द्र सरकार के खिलाफ विपक्ष को लामबंद कर रहे हैं विपक्ष की अगुवाई कर रहे हैं। इन दलीलों को सुनकर लगता है कि वास्तव में लालू यादव का असली दोष यही है और यदि लालू यादव विपक्ष की लामबंदी नही करने की गारंटी दें तो उन्हें रियायत दी जा सकती है। सीबीआई के वकील ने केवल इतने पर ही बस नही कि उन्होंने मानों कोर्ट में लालू यादव का असली गुनाह ही उजागर करके रख दिया हो इस तर्ज में वकील ने कोर्ट को बताया कि और तो और उन्होंने विगत अगस्त महीने में देश की 20 विपक्षी पार्टियों को बुलाकर पटना में बड़ी रैली आयोजित की। वो केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक हो रहे हैं।

सीबीआई कोर्ट के वकील की इन दलीलों के बाद विडंबना यह है कि कोर्ट ने सीबीआई वकील की दलीलों को ही तरजीह देते हुए उन्हें दिल्ली नही भेजने पर मोहर लगा दी। केवल इतना ही नही कोर्ट ने जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि उन्होंने बगैर कोर्ट की इजाजत के लालू यादव को इलाज के लिए रिम्स क्यों भेजा। जेल अधीक्षक को एक सप्ताह में जवाब देना है। ऐसी स्थिति में तेजस्वी यादव का अपने पिता की जान को खतरे की आशंका निर्मूल नही जान पड़ती है। लालू यादव को इलाज के लिए दिल्ली नही भेजने का अर्थ है सीबीआई वकील की दलीलों को कोर्ट द्वारा प्राथमिकता देना और मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी लामबंदी को रोकना, खत्म करना। ऐसी सूरत में यह पूरा मामला सीबीबआई की दलीलों से अपराधिक मुकदमा कम और राजनीतिक मामला अधिक बनता दिख रहा है।