यूपी बना पुलिसिया जंगलराज, पुलिस ने बेवजह की जेएनयू शोध छात्र की बर्बर पिटाई

आईएनएन भारत डेस्क
इलाहाबादः यूपी में योगी सरकार के राज में बेलगाम होती पुलिस यूपी को बर्बर पुलिसिया जंगलराज में बदलने पर अमादा है। इसके अलावा पुलिस और प्रशासन में हावी ठाकुरशाही भी पुलिस और प्रशासन को सांप्रदायिकता और जातिवाद के जिस रंग से रंग रही है उसे देखते हुए इसे पुलिसिया जंगलराज ही कहना उचित होगा। हाल ही में इलाहाबाद शहर के करैली थाना के थानाध्यक्ष सर्वेश सिंह ने जेएनयू के छात्र को नक्सली और देशद्रोही का आरोप लगाकर सरे बाजार उठा लिया और छात्र की बुरी तरह पिटाई की।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के शोध छात्र और पूर्व में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके भरतमणी चौधरी अपने शोध कार्य हेतु इलाहाबाद आये गये हुए थे। जहां कल 21 मार्च को शाम 6 बजे वह करैली थाना क्षेत्र में अपने शोध सम्बंधित कार्यों हेतु और खाना खाने निकले थे। भरत मणि की दाढ़ी को देखकर पुलिसकर्मियों ने पहले उनसे कहा कि वो मुसलमान हैं, जिस पर भरतमणि ने कहा कि नही मेरा नाम तो भरतमणि चौधरी है और अपना परिचय जेएनयू के शोध छात्र के रूप में दिया। जिस पर थानाध्यक्ष सर्वेश सिंह आग बबूला होकर नक्सली और देशद्रोही कहकर गाली गलौज करने लगें। जब भरत ने इसका विरोध किया तो उसे पकड़कर थाने ले जाकर बुरी तरह से पीटा और भरत का पूरा नाम सुनते ही जातिसूचक गालियां देने लगें और धारा 151,107,116 लगाकर उसे जेल भेज दिया। इस पूरे प्रकरण में थाने में मांगने पर छात्र को पानी तक भी पीने के लिए नही दिया।

इस घटना की सूचना मिलने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता राम करन निर्मल, अंकुश यादव तथा अन्य समाजवादी छात्र नौजवान साथियों के प्रयासों के चलते जेएनयू के छात्र भरतमणि चौधरी को रिहा कराया गया। भरतमणि को चोट भी लगी है। जिसको लेकर छात्रों में काफी रोष है।

इसके बाद अगले दिन 22 मार्च को सारे छात्र 11 बजे इलाहाबाद छात्रसंघ भवन पर इकट्ठे होना शुरू हुए और पुलिस प्रशासन की गुंडागर्दी के खिलाफ छात्रों ने एसएसपी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। एसएसपी को पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ ज्ञापन भी दिया गया।