एनडीए में बढ़ी तकरार, सहयोगियों के तेवर बता रहे हैं कि जहाज डूबने वाला है

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली। पहले मांझी और उसके बाद यूपी उप चुनाव के परिणाम आते ही टीडीपी ने एनडीए से बाहर का रास्ता क्या लिया कि भाजपा के अन्य सहयोगी भी कुछ छूपे और खुले अंदाज में भाजपा नेतृत्व को आंख दिखा रहे हैं और भाजपा इस कदर बैकफुट पर चली गई है कि महावीरी छोड़ सहयोगियों की मान मनौवल में लग गई है।

मांझी और चन्द्रबाबू के बाद अब उत्तर प्रदेश से भाजपा सरकार में सहयोगी और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बगावती तेवर भाजपा की नींद उड़ा रहे हैं और जनता से लेकर नेताओं तक को धमकाने और दबंगई भरे बोलों के लिए कुख्यात राजभर की बगावत से इतना दहल गये हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना को उन्हें मनाने का जिम्मा सौंपा है। इसके अलावा दिल्ली से प्रदेश भाजपा प्रभारी ओम प्रकाश माथुर ने भी फोन कर उन्हें समझाने और मनाने की कोशिश शुरू की है। राजभर के तेवर हैं कि ढ़ीले पड़ने का नाम ही नही ले रहे हैं, उन्हें दिल्ली भी बुलाया गया, लेकिन उन्होंने जाने से साफ मना कर दिया। उन्होंने यहां तक भी धमकी दे डाली है कि यदि उनकी नही सुनी गई तो वे राज्यसभा में वोट नहीं देंगे। उन्होंने भाजपा पर गठबंधन का धर्म नहीं निभाने का आरोप भी लगाया।

राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी खराब है कि गरीब परेशान हैं और सरकार जश्न मना रही है। इस सरकार में दलितों.पिछड़ों की उपेक्षा हो रही है।ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भाजपा की सहयोगी दल है और उसके चार विधायक हैं। उनकी नाराजगी और गुस्सा इस कदर भारी है कि सरकार के एक साल पूरा होने पर आयोजित कार्यक्रम का भी उन्होंने बहिष्कार कर दिया था।

वहीं दूसरी तरफ भाजपा के एक अन्य सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के विधायकों में भी राज्य सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। इसके अलावा अचानक से रामविलास पासवान और नीतीश की सो रही धर्मनिरपेक्षता भी लगता है कि अचानक करवटें लेने लगी है। दोनों की चिंताओं में भी गजब की समानता देखने को मिल रही है। रामविलास पासवान ने भाजपा को सीख देते हुए कहा है कि भाजपा को मुस्लिमों को लेकर अपना पर्सेप्सन बदलना होगा और उनके इस सुविचार पर प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश कुमार ने साफ कहा कि पासवान जो कह रहे हैं ठीक ही कह रहे होंगे। वह सोच समझकर बात करते हैं गलत थोड़े ही बोलेंगे। साथ ही उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी पासवान से हाल ही में कोई मुलाकात नही हुई है। इसके अलावा नीतीश कुमार ने कहा कि प्रेम सहिष्णुता और सद्भावना से ही देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने अपनी स्टैंड पर सफाई देते हुए यह भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता में उनके स्टैंड में कोई बदलाव नही आया है।

यूपी उप चुनाव के बाद भाजपा के सहयोगियों बदलते स्वर साफ बता रहे हैं कि भाजपा नीत एनडीए गंभीर संकट का सामना कर रहा है और एक के बाद एक सहयोगी नई राह की तलाश में लग गये हैं। एनडीए सरकार के चार साल पूरे होते होते और चुनावी साल की तरफ बढ़ते ही भाजपा के सहयोगियों को धर्मनिरपेक्षता से लेकर दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक सभी याद आ रहे हैं। इसमें सबसे प्रमुख राजनीति में मौसम विज्ञानी कहे जाने वाले पासवान का बयान अहम है। उनके बारे माना जाता है कि वह मौसम बदलने की आहट समझ लेने में सबसे माहिर व्यक्ति हैं। वह जान लेते हैं कि उंट अब किस करवट बैठेगा और किधर का रूख करने में भलाई है। राजनीति के जानकार उनके बयान को ही एनडीए का जहाज डूबने की शुरूआत की आहट मानकर चल रहे हैं।