वाम-दक्षिण का सवाल बनाकर दोषी प्रोफेसर को बचाना चाहतें है जेएनयू प्रशासन और सरकार

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्लीः जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल आॅफ लाईफ साइंसेज के एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए 9 से अधिक छात्राएं सामने आ चुकी हैं। फिर भी प्रशासन और दिल्ली पुलिस जांच की बात कहकर पूरे मामले को रफा दफा करने पर अमादा हैं।

जेएनयू के छात्र इस सवाल पर दिल्ली महिला आयोग भी पहुँच चुके हैं और लगातार कई दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में प्रोफेसर के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। इसके बावजूद भी प्रोफेसर को बचाने में विश्वविद्यालय प्रशासन जी जान से जुटा है। बताया जाता है जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय को गुरूकुल बनाने पर तुली संघी सरकार के अभियान के पीछे इन्ही प्रोफेसर का दिमाग है और योजनाएं काम कर रहीं हैं। इसीलिए मानव संसाधन मंत्रालय से लेकर पूरा संघी गिरोह इस प्रोफेसर को बचाने के लिए हर तरह के हथकंड़े अपना रहा है।

यहां तक कि इस प्रोफेसर पर लगे आरोपों को लेकर प्रशासन और संघ के लोग यह फैलाने से भी बाज नही आ रहे हैं कि यह वामपंथी तत्वों की प्रोफेसर को फंसाने की साजिश है। उन्हें लगता है कि इस पूरे मामले को वाम-दक्षिण संघर्ष में बदलकर प्रोफेसर को बचाया जा सकता है। परंतु जेएनयूएसयू अध्यक्ष गीता का कहना है कि प्रोफेसर पर आरोप लगाने वाली 9 छात्राओं में से 3 तो एबीवीपी से संबंध रखती हैं। फिर यह पूरा मामला वाम बनाम दक्षिण कैसे हो सकता है। कई छात्रों को तो यहां तक भी कहना है कि यह प्रोफेसर के संघी संस्कार ही हैं जिन्होंने उन्हें पूरी तरह फंसाकर रख दिया है। उन्हें आजतक समझ नही आ पाया था कि औरत भी समाज में एक स्वतंत्र व्यक्ति होती है। वह तो अपने संस्कारों के वशीभूत होकर उसे आदमी की संपति ही समझते रहे थे।

अब पूरे प्रकरण में जहां प्रोफेसर पूरी तरह फंसे हुए नजर आ रहे हैं तो संघ द्वारा नियंत्रित जेएनयू प्रशासन इस पूरे मामले को वाम बनाम दक्षिण का रंग देकर बचाने की लगातार जुगत लगा रहा है और इसी कारण से अभी तक ना पुलिस और ना ही जेएनयू प्रशासन ने प्रोफेसर के खिलाफ कोई कार्रवाई की है।