बढ़ती बेरोजगारी और आत्महत्या करते नौजवान

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली। देश में शिक्षा बजट लगातार घटता जा रहा हैं। निजी शिक्षण संस्थानों की बाढ़ सी आ गईं हैं, जहाँ शिक्षा प्राप्त करना अपने आप में संघर्ष हैं। निजी शिक्षण संस्थानों के फ़ीस लाखों में हैं। और जब छात्र लाखों रुपए ख़र्च कर शिक्षा पा कर, कैंपस से बाहर निकलते हैं तो नौकरियां मिलती नहीं।

गृह राज्य मंत्री श्री हंसराज गंगाराम ने राज्यसभा में एक प्रश्न के जबाब में सदन को बताया कि वर्ष 2014-2016 के बीच 26,500 छात्रों ने आत्महत्या किया।

मंत्री महोदय ने कहा कि वर्ष 2016 में 9,474 छात्रों, वर्ष 2015 में 8,934 छात्रों और वर्ष 2014 में 8,068 छात्रों ने आत्महत्या किया।

वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा 1,350 छात्रों ने आत्महत्या माहराष्ट्र में किया। दूसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल(1,147), तीसरे स्थान पर तमिलनाडु (981), और चौथे स्थान पर मध्यप्रदेश (838) का छात्र आत्महत्या में रहा। वहीं 2016 में भी महाराष्ट्र 1,230 छात्रों के आत्महत्या के साथ अबल रहा और तमिलनाडु 955 छात्रों के आत्महत्या के साथ दूसरे स्थान पर रहा था।

गृह राज्य मंत्री द्वारा राज्यसभा में दिए गए जबाब से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्र आत्महत्या बढ़े हैं। इन आत्महत्याओं के बढ़ने के पीछे का कारण दिन प्रतिदिन महँगी होती शिक्षा और रोजगार के अवसर का लगातार घटना हैं।

शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि आम छात्रों के पहुँच से दूर हो गई हैं। जिनके पहुच में शिक्षा हैं भी वो हाथ मे डिग्रीयां लेकर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो रहे हैं। क्योंकि रोजगार में भारी गिरावट आई।