मोदी की मुश्किलों का दौर शुरू, टूटने लगा है एनडीए, मांझी के बाद चन्द्रबाबू बाहर

आईएनएन भारत डेस्क

नई दिल्लीः कुछ ही दिनों पहले केन्द्रीय केबिनेट से अपने दो मंत्रियों का इस्तीफा करवाने वाली टीडीपी ने भी अब भाजपा से किनारा कर लिया है। बजट सत्र के दौरान ही बिहार में एनडीए की सहयोगी हम पार्टी के नेता जीतनराम मांझी के बाद एनडीए को छोड़ने वाली टीडीपी दूसरी पार्टी बन गई है। वहीं हमेशा से भाजपा की सहयोगी रही शिव सेना के सुर भाी कुछ बदले बदले से नजर आ रहे हैं और वह देवेन्द्र फडणवीस की सरकार के लिए खतरे का कारण बन सकती है। इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी टीडीपी की मांग का समर्थन करते हुए इस मसले पर चन्द्रबाबू नायडू का साथ देने का इशारा किया है। परंतु वही दूसरी तरफ जदयू के प्रवक्ता क सी त्यागी कुछ और ही भाषा बोल रहे हैं औैर अब वो जदयू के कम एनडीए के प्रवक्ता अधिक दिखाई पड रहे हैं। लेकिन पूरे घटनाक्रम को देखकर लगता है कि मोदी की मुश्किलों का दौर शुरू हो चुका है।

 

विशेष राज्य के दर्जे के सवाल पर और आंध्र में गिरती साख को बचाने के मद्देनजर टीडीपी नेता चन्द्रबाबू नायडू ने अब एनडीए से अलग होने की घोषणा कर दी है बल्कि एनडीए के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी तैयारी शुरू कर दी है। टीडीपी सांसद जयदेव गाला ने तो यहां तक कह दिया कि बीजेपी ने गंदी राजनीति करना शुरू कर दिया है। उन्होंने तमिलनाडु में क्या किया, छोटी पार्टियों को उकसाया और बड़ी पार्टियों में फूड डाली। अब यही रणनीति वे आंध्र में भी आजमाना चाहते हैं। हमें इस सरकार में जरा भी भरोसा नहीं बचा।

 

अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आज संसद में गतिरोध होने के बाद टीडीपी और टीएमसी के सांसदों ने एक साझा बैठक करके आगे की रणनीति पर विचार किया। हालांकि इससे पहले वायएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी ने अविश्वास का प्रस्ताव दे दिया था और उनके प्रस्ताव को जरूरी 50 सांसदों का समर्थन भी हासिल था परंतु लोकसभा अध्यक्ष ने इसे यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि सदन ठीक से नही चल रहा है। उनकी इस प्रतिक्रिया पर कई दलों के नेताओं ने आश्चर्य जाहिर करते हुए कहा कि सरकार के पास अगर बहुमत है तो उसे किस बात का डर है। लगता है कि सरकार घबराई हुई है, उसे अपने सहयोगियों पर भी विश्वास नही है।

 

इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुर भी कुछ बदले बदले नजर आ रहे हैं। वह भी विशेष राज्य के दर्जे के सवाल पर सरकार को इशारों ही इशारों में घेरते नजर आते हैं और यह पहली बार नही है। जब टीडीपी के सांसदों ने इस्तीफा दिया था तब भी नीतीश कुमार उनके समर्थन में उतर आये थे। मगर उनकी पार्टी के प्रवक्ता के सी त्यागी दूसरी तरफ एनडीए सरकार के बने रहने की गारंटी देते नजर आये। परंतु पूरे प्रकरण से यह तो साफ हो गया है कि एनडीए का कुनबा अब टूटने लगा है। पहले मांझी अब चन्द्रबाबू नायडू और साथ ही शिवसेना के बागी तेवर एनडीए में दरार और टूट का इशारा दे रहे हैं।