मांगे नही माने जाने तक धरने के लिए अडे किसान, मुख्यमंत्री फडणवीस के विरोधाभासी बयान

आईएनएन भारत डेस्क:
मुम्बई। नासिक से 5 मार्च को चलकर और 180 किलोमीटर की दूरी तय करके किसानों का लांग मार्च मुम्बई में पड़ाव डाल चुका है। किसानों के मुम्बई पहंुचने और सरकार से बातचीत शुरू करते ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के देवेन्द्र फडणवीस के विरोधाभासी बयान शुरू हो गये हैं। मुख्यमंत्री के विरोधाभासी बयानों से भाजपा सरकार की मंशा का पता चल रहा है कि वह जैसे तैसे कोरे आश्वासनों से किसानों के लांग मार्च का समापन कराकर इस मामले को टालना चाहती है।

महाराष्ट्र विधानसभा में बोलते हुए राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसानों के सवालों पर सकारात्मकता से विचार करना चाहती है और सरकार लांग मार्च के पहले दिन से ही किसानों के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि हमारे मंत्री गिरीश महाजन पहले दिन से ही किसानों के संपर्क में हैं और हम उनकी अधिकतर मांगों को पूरा करना चाहते हैं। परंतु किसान लांग मार्च करने के लिए अड़े हुए थे। यह बयान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने किसानों से मिलने के पहले विधानसभा में दिया।

बता दें कि दो दिन पहले तक किसान नेता कह रहे थे कि सरकार की तरफ से अभी तक किसानों से कोई संपर्क नही किया गया है और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उनकी सरकार पहले दिन से ही किसानों के संपर्क में हैं। जिन गिरीश महाजन का हवाला देकर मुख्मंत्री कह रहे हैं कि वह पहले दिन से किसानों के संपर्क में हैं, उन्होंने रविवार 11 मार्च को ही किसानों से जाकर बातचीत की शुरूआत की थी और किसानों के मार्च का पहला दिन 5 मार्च था। जहां तक गिरीश महाजन का सवाल है उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की मांगों को लेकर गंभीर है और कर्ज माफी सहित किसानों की 80-90 प्रतिशत मांगे माने जाने की आशा है।

वहीं दूसरी तरफ किसान नेता और अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धावले ने कहा कि हमने मार्च 2016 में मुख्यमंत्री को उन मांगों का एक मांगपत्र सौंपा था जिनके लिए हम आज मुम्बई आये हैं। हमें आशा थी कि फणनवीस नये मुख्यमंत्री हैं और वह किसानों की मांगों पर सकारात्मकता से विचार करेंगे परंतु 2016 से अब तक उन्होंने कुछ नही किया। उनका कहना था कि बिना शर्त संपूर्ण कर्ज माफी होगी तभी तो किसानों की आत्महत्यायें रूकेंगी। ध्यान रहे कि जब से महाराष्ट्र सरकार की तथाकथित 4 हजार करोड़ की कर्ज माफी हुई है तबसे अब तक राज्य में 1753 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

किसान नेता अशोक धावले का कहना था कि अबकी बार केवल खाली आश्वासन किसानों को नही चााहिए हम अपनी सभी मांगों को पूरा करने का एक समयबद्ध लिखित आश्वासन लेकर ही यहां से उठेंगे। दूसरी तरफ राज्य के पुलिस महानिदेशक का कहना था कि किसानों को विधान भवन तक नही जाने दिया जायेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार किसानों का प्रतिनिधिमंडल विधानसभा पहुंच चुका था और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल और सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ 3.45 मिनट पर मीटिंग शुरू हो चुकी थी।

बता दें कि विधानसभा भवन की तरफ कूच करने के लिए 50 हजार से अधिक किसान मुम्बई के आजाद मैदान में डटे हुए हैं।

हालांकिबताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने किसानों की अधिकतर मांगों को 2 महीने में पूरा करने का आश्वासन दिया है यह भी कहा है कि यह आश्वासन लिखित में किसान नेताओं को सरकार की तरफ से दिया जायेगा। इसके बाद धरना समाप्त कर किसानों के घर लौट जाने की आशा है।