त्रिपुरा में हिंसा आगजनी के बाद 13 जिलों में धारा 144, भाजपा नेताओं के बेतुके बोल जारी

आईएनएन भारत डेस्क:

नई दिल्ली। त्रिपुरा विधानसभा में भाजपा की जीत के साथ ही माकपा और वाम दलों पर भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं के हमलों के बीच राज्य के 13 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई।

जहां केन्द्रीय गृहमंत्रालय शान्ति बनाये रखने और काननू व्यवस्था बनाये रखने के लिए अतिरिक्त बल मुहैया कराने की बात कह रहा है तो वहीं भाजपा नेताओं की बदजबानी है कि रूकने का नाम नही ले रही है। एक तरफ सुब्रहमण्यम स्वामी ने जहां लेनिन की मूर्ति को गिराये जाने पर लेनिन को ही आतंकवादी कह दिया तो वहीं केन्द्रीय मंत्री और हमेशा बेतुके बोलों के लिए जाने पहचाने जाने वाले गिरिराज सिंह ने कहा कि वाम शासन से त्रस्त जनता ने ही लेनिन की मूर्ति को गिरा दिया है। वहीं भाजपा के एक नेता ने इसे माकपा से भाजपा में आये नये भाजपा कार्यकर्ताओं का कारनामा बताया।

जहां एक तरफ भाजपा और संघ लेनिन की मूर्ति को गिराकर और वाम कार्यकर्ताओं की संपति को नुकसान पहंुचाकर अभिभूत है तो वहीं चारो तरफ विभिन्न दलों के नेताओं ने इस संघी करतूत की निदा शुरू कर दी है। भाजपा की सहयोगी जदयू के राज्यसभा सांसद हरिवंश सिंह ने इस कृत्य की निन्दा करते हुए कहा कि देश में सभी विचारधाराओं के लिए जगह है और इस प्रकार का कृत्य जनवाद के लिए कतई ठीक नही है।

टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने भाजपा और संघ को चेताया और कहा कि मेरा माकपा से विरोध है और मैंने उनसे संघर्ष करके ही सत्ता हासिल की है परंतु लेनिन, माक्र्स, गांधी, विवेकानन्द, नेहरू जैसे महापुरूषों का अपमान कोई करे यह सहन नही किया जा सकता है।

भाकपा महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने पार्टी की तरफ से बयान जारी कर भाजपा और आईएफपीटी द्वारा वाम कार्यकर्ताओं और कार्यालयों पर हमले की कड़ी निन्दा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। भाकपा नेता डी राजा ने भी इस हिंसा के लिए भाजपा-संघ को दोषी ठहराते हुए कहा कि लोकतंत्र में ऐसी हरकतों के लिए कोई जगह नही है।

इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में इस संघी उत्पात के खिलाफ प्रदर्शन किये गये। कालकता में माकपा ने एक विशाल विरोध रैली का आयोजन किया और कलकतता में एक विरोध प्रदर्शन में मोदी का पुतला भी फूंका गया।