Film Review:”वीरे की वेडिंग” बरातियों का स्वागत करने में रही नाकाम

Film Reviewer: Smriti Mala
फ़िल्म: वीरे की वेडिंग
निर्देशक: आशु त्रिखा
लेखक: दीपा बक्षी, दिलीप शुक्ला
अभिनय: पुलकित सम्राट, कीर्ति खरबंदा, जिम्मी शेरगिल, सतीश कौशिक
संगीत: स्कोर: संजोए चौधरी
           गाने: मीत ब्रदर्स, जयदेव कुमार, अशोक पंजाबी, फ़रजान फैज़
रिलीज डेट: 2 मार्च 2018
रनिंग समय: 2 घंटे
शैली: रोम-कॉम 

“वीरे की वेडिंग” वेडिंग जैसी ही है जहां सिर्फ दूल्हा और दुल्हन नए होते हैं और बाकी सारी चीजें वही पुरानी होती है। यह बॉलीवुड की बहुत सारी दूसरे वेडिंग फिल्मों की तरह हैं जिसको अटेंड करना समय की बर्बादी लगती है।

कहानी: फिल्म की कहानी वीर अरोड़ा और गीत के प्रेम और शादी करने के गिर्द घूमती है। वीर की लाइफ में कोई समस्या नहीं है, इसलिए वह दूसरों की समस्या दूर करता है। वीर गीत से प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है। वीर के बड़े भाई बल्ली के गीत के परिवार को धमकाने के कारण मामला और बिगड़ जाता है। दोनों परिवार शादी के लिए तैयार नहीं होते। वीर कैसे गीत के परिवार वालों को शादी के लिए मनाता है यही है पूरी कहानी।

कहानी कोई नई नहीं है। ऐसी फिल्में बॉलीवुड में आए दिन बनती है। ना कोई नया आयाम ना कोई नई एंडिंग।  ऐसे में फिल्म काफी बोरिंग लगती है। डायलॉग थोड़े नए हैं, लेकिन वह भी फिल्म को नहीं बचा पाते।

अभिनय: पुलकित सम्राट फिल्म में सलमान की याद दिलाते हैं, लेकिन सलमान जैसा करिश्मा नहीं दिखा पाते। कीर्ति खरबंदा अपने रोल में क्यूट और ग्लैमरस लगी है। जिम्मी शेरगील ने बेहतरीन अभिनय किया है।

संगीत: “चल हट जा ताऊ” हरियाणवी गाने की रीमिक्स दिल को लुभाती है। इसके अलावा “माइंड ब्लोइंग”,  “वीरे की वेडिंग”, ” टल्ली टुनाइट”  कोई खास नहीं लगता।

सकारात्मक पक्ष: गाने

नकारात्मक पक्ष: कहानी, पटकथा, निर्देशन

निष्कर्ष: बहुत ज्यादा फुरसत हो तो फिल्म देख सकते हैं।

रेटिंग: 1.5 / 5