होली, दिवाली और गौ, गंगा, श्मशान पर हजारों करोड़ बहा देने वाले योगीराज में वेतन ना मिलने से भूखमरी के कगार पर कर्मचारी

आईएनएन भारत डेस्क:
साहिबाबाद। उ. प्र. में सत्तासीन होते ही योगी आदित्यनाथ ने मानो धार्मिक आयोजनों के लिए खजाने का मुंह ही खोल दिया है। देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री को सरकारी खर्च पर त्योहार मनाकर अपनी धार्मिक आस्थाओं को तुष्ट करने की फिक्र तो है परंतु इस बात की जरा भी परवाह नही है कि उनके राज्य में कुछ कामगार पांच सालों से पगार की बाट जोहते हुए भूखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। कामगार भी वाणिज्य कर विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग से संबद्ध हैं। पिछले पांच सालों से वाणिज्य कर विभाग साहिबाबाद में पल्लेदारी करने वाले यह कामगार मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक हर दरवाजे पर गुहार लगा चुके हैं।

बताया जाता है कि सरकार ने सितंबर 2012 से आज तक वाणिज्य कर विभाग के इन कामगारों को वेतन नही दिया है। सितंबर 2012 में भी पल्लेदारों को भुगतान मानवाधिकार आयोग के आदेश करने के बाद ही मिल पाया था। पल्लेदारों की और से भाकपा जिला सचिव जितेन्द्र शर्मा ने फिर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने इन कर्मचारियों को वेतन दिलवाने के लिए गुहार लगाई है। इस बार इन पल्लेदारों के आवेदन पर गौर करने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इनकी शिकायत को उ. प्र. के मानवाधिकार आयोग को भेज दिया है। हालांकि अभी तक भी वेतन का भुगतान नही हुआ है।

इस बारे में वाणिज्य कर विभाग के संयुक्त आयुक्त हीरा लाल वर्मा का कहना था कि यह सही है कि पल्लेदारों को वेतन नही मिला है। परंतु अब शासन ने उनका वेतन मंजूर कर दिया है और नये वित्त वर्ष में उन्हें वेतन मिल जाने की उम्मीद है।

उ. प्र. के मुख्यमंत्री जब से सत्ता में आये हैं उनका पूरा ध्यान लगता है कि त्योहारों के आयोजन तक ही सिमटकर रह गया है। राज्य में दलितों पर लगातार हमले हो रहे हैं, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, पिछड़े और अल्पसंख्यक एवं अन्य वंचित तबके बेहाल हैं। नौजवान रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। बीएचयू जैसे विख्यात विश्वविद्यालय में छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें और प्रताड़ना होती रही, वाचाल कुलपति ढिठाई से अटपटे बयान देते रहे और उ. प्र. प्रशासन त्योहार दर त्योहर आयोजन और गौ, गंगा, श्मशान पर हजारों करोड़ बहाता रहा परंतु शिकायत किये जाने के एक साल बीत जाने तक भी सूबे के मुख्यमंत्री को भूखे मरते वाणिज्य कर विभाग के कामगारों को वेतन दिलवाने की सुध नही आई।

हर दरवाजे पर गुहार लगाने और सभी विभागों में शिकायतों के अंबार लगा देने के बाद वाणिज्य कर विभाग के पल्लेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उन्हें न्याय नही मिला तो वह केवल त्योहरों और गौ, गंगा, श्मशान की चिंता में संलिप्त रहने वाले मुख्यमंत्री के धर्म का त्याग कर देंगे। ध्यान रहे इन पल्लेदारों ने 10 अप्रैल 2017 को शिकायत देकर मुख्यमंत्री को वेतन दिलवाने के लिए गुहार लगाई थी। परंतु अभी तक हालात जस के तस बने हुए हैं। अब इन कामगारों की हालत काफी बिगड़ चुकी है। यह कामगार दाने दाने को मोहताज हो गये हैं। हर दरवाजे पर शिकायत देने और सर पटकने के बाद भी इन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं वेतन नही।