गुरू कृपा पर टिके पीएचडी राज को बीएचयू शोध मोर्चा की चुनौती

आईएनएन भारत डेस्क:
वाराणसी। बीएचयू शोध मोर्चा ने बनारस हिंदू विश्वविद्याालय के गेट पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए वंचित वर्ग के छात्रों के अवसरों को खत्म करने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विरोध प्रदर्शन में अपनी आवाज दोरदार तरीके से उठाते हुए बीएचयू शोध मोर्चा ने यूजीसी के उस आदेश का विरोध किया जिसमें उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए पूरी तरह से गुरू कृपा पर आश्रित होना पड़ता है और छात्र की अपनी योग्यता को नजर अंदाज कर दिया जाता है।

यूजीसी के आदेश का विरोध करते हुए शोध मोर्चा ने कहा कि पहले जहां नेट/एसईटी/एसएलईटी के बल पर वंचित वर्ग के मेधावी छात्र असिस्टेंट प्रोफेसर तक बन जाते थे तो वहीं यूजीसी के नये तुगलकी आदेश ने वंचित वर्ग के छात्रों के लिए उन संभावनाओं को बंद कर दिया है। शोध मोर्चा का मानना था कि अब पूरी तरह से वंचित वर्ग के सहित सभी छात्रों को तथाकथित गुरूओं की दयादृष्टि अर्थात उनकी कृपा पर निर्भर होना पड़ेगा की वह वाइवा में उन्हें दाखिला पाने लायक अंक देते हैं कि नही।

शोध मोर्चा ने विभिन्न विदेशी कंपनियों द्वारा विश्व्विद्यालयों की रैंकिंग कराये जाने का भी कड़ा विरोध किया। मोर्चा के अनुसार इससे विश्वविद्यालयों पर रैंकिंग पाने को दबाव बढ़ेगा और इस रैंकिंग सिस्टम की आड़ में कारपोरेट जगत का दखल विश्वविद्यालयों के संचालन में बढ़ेगा। यूजीसी के नये ड्राफ्ट को वंचित छात्रों का विरोधी बताते हुए शोध मोर्चा ने बीएचयू के लंका गेट पर प्रदर्शन किया और प्रारूप की कड़ी निन्दा की।

इस अवसर पर बोलते हुए यूनाइटेड ओबीसी फोरम के कुणाल सुमन ने भी यूजीसी के इस प्रारूप की जमकर बखिया उधेड़ी। दिल्ली से आये कुणाल ने अपने संगठन की तरफ से इस लडाई के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए कहा कि ओबीसी फोरम शोध मोर्चा के इस संघर्ष में पूरी तरह से उसके साथ है।