पीएनबी घोटाले पर प्रधानमंत्री मोदी की नयी जुमलेबाजी ‘‘नई अर्थव्यवस्था-नया शासन‘‘

इकाॅनोमिक्स टाइम्स की ग्लोबल बिजनेस समिट में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएनबी घोटाले पर पहली बार टिप्पणी की। अपने भाषण में हालांकि उन्होंने अरूण जेटली की तर्ज पर आरबीआई और आॅडिटर्स को ही निशाने पर लिया परंतु हमेशा की तरह उन्होंने यहां भी एक नया जुमला छोड़ ही दिया। मोदी ने हमेशा की तरह कह दिया कि किसी को बख्शा नही जायेगा और लोेगों को एक और नया जुमला पढ़ाते हुए कहा कि यह ‘‘नई अर्थव्यवस्था-नये शासन‘‘ का मूल मंत्र है।
असल में यह प्रधानमंत्री मोदी की भाषण शैली का अंदाज है कि जब कभी भी किसी बड़े राजनीतिक संकट का सामना करते हैं तो इस प्रकार के लुभावने जुमले उछालकर अपने भाषण को प्रभावी बनाने का काम करते हैं। कभी तीन एच, कभी तीन आई कभी न्यू इण्डिया और कभी टीम इण्ड़िया और कभी विदेशी मेहमानों को जिगरी दोस्त आदि बताकर विविध प्रकार की जुमलेबाजी से अपने भाषण में प्रभाव पैदा करते हैं। लेकिन उन्होंने इस जुमले गढ़ने और बोलने को इतना अधिक और नियमित तौर पर दोहराया है कि अब उनके इन जुमलों में कोई असर रह नही गया है। यहां सवाल यह है कि यदि आप जनता के पैसे को लेकर और धनपशुओं द्वारा उसकी लूट को लेकर इतने संजिदा हैं तो क्यों नही देश के सामने या फिर संसद के सामने ही इन जान बूझकर कर्ज की अदायगी नही करने वालों के नाम उजागर कर देते हैं। क्यों नही लोंगो को बता देते हैं कि देश की जनता का लाखों करोड़ रूपया कर्ज लेकर लौटाने वाले कौन से लोग हैं और आपने उनसे कर्ज वापसी के लिए अभी तक क्या कड़े कदम उठाये हैं। या फिर प्रधानमंत्री यही बता दें कि आपकी इस प्रकार की जुमलेबाजी से कैसे देश के बैंकों का अरबों रूपया लूटने वाले दण्ड़ित हो जायेंगे। शायद आपके जुमलों में वह घबराहट पैदा करने की ताकत हो जिसे देश की जनता और जनता का पैसा लूटने वाले समझ ही नही पायें हों।
वैसे प्रधानमंत्री जी आप शायद जुमलेबाजी के खुमार में जनता के पैसे के लुटेरों के नाम नही बतायें परंतु पिछले दिनों राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय ने एक आंकड़े में कुछ चुने हुए कर्ज डिफाल्टर्स के नाम गिनवाये थे। जिसे हम आपके सामने पेश कर रहे हैं। आप इसी सूची में शामिल सबसे कर्ज डिफाल्टर्स का हिसाब बता दें कि कब इनसे पैसे वापस लेंगे। हम आपकी जुमलेबाजी को नई अर्थव्यवस्था का मूलमंत्र मानेंगे। संजय सिंह द्वारा बताये गये नामों की सूची इस प्रकार हैः
रिलायंस ग्रुप रू 1 लाख 25 हजार करोड़ का कर्ज

वेदान्ता ग्रुप रू 1 लाख 3 हजार करोड़ का कर्ज

एस्सार ग्रुप रू 1 लाख 1 हजार करोड़ का कर्ज

अडानी ग्रुप रू 96 हजार करोड़ का कर्ज

जेपी ग्रुप रू 75 हजार करोड़ का कर्ज

जेएसडब्ल्यू ग्रुप रू 58 हजार करोड़ का कर्ज

जीएमआर ग्रुप रू 47 हजार करोड़ का कर्ज

वीडियोकाॅन ग्रुप रू 45 हजार करोड़ का कर्ज

बड़े उद्योगपतियों पर कुल 8 लाख 55 हजार करोड़ का कर्ज है।
प्रधानमंत्री जी, आशा है कि अब देश की जनता जुमलेबाजी नही आपकी कार्यवाही देखेगी।