टिस्स में एससी-एसटी स्कॉलरशिप बंद करने के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन

आईएनएन भारत डेस्क

मुंबईः टाटा समाजिक विज्ञान संस्थान (टिस्स), मुम्बई प्रशासन की हालिया अधिसूचना में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए वित्तीय सहायता वापस लेने के लिए नोटिस निकला है। जिसके विरोध में 21 फरवरी, 2018 को टीआईएसएस छात्र संघ ने हड़ताल का अवाहन किया। 2015 में ओबीसी छात्रों के लिए पहले से ही वित्तीय सहायता वापस ले ली गई थी। इसके बाद पिछड़े वर्ग से जुड़े छात्र लगातार फीस में बढोतरी होने की वजह से टीआईएसएस छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं या यहाँ पर आवेदन करने से भी वो कतरा रहे हैं।

 

छात्रों ने कल रात टीआईएसएस के परिसर में एक प्रतिरोध मार्च आयोजित किया। सुबह सात बजे से छात्र इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए परिसर के बाहर जमे हुए थे। परिसर में सभी कक्षाओं में सफल शटडाउन करने के बाद लगभग 500 छात्रों ने टीआईएसएस मुख्य गेट पर इकट्ठा होकर गेट को अवरुद्ध कर दिया। जिसके चलते 3 घंटे के बाद आखिर में कॉलेज प्रशासन ने छात्रों से मुलाकात की।

 

वहीं हैदराबाद, गुवाहाटी, तुलजापुर में भी छात्रों ने अपने अपने परिसरों में विरोध प्रदर्शन किये। इसके बाद भी प्रशासन ने मौके पर छात्रों की मांगों को मानने से इनकार कर दिया और उत्तर देने के लिए 24 घंटे का समय माँगा। संस्थान के पूर्व निदेशक परशुरामन ने छात्रों को अपमानजनक तरीके से संबोधित करते हुए कहा की संस्था पिछले 14 वर्षों से छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। लेकिन अब करने में अक्षम है।

वही छात्रों ने कहा की जब तक प्रशासन छात्रों की मांग पूरी नहीं करता, तब तक वह अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। छात्रों का कहना है कि टीआईएसएस की मांग के अनुसार और वित्तीय सहायता को रद्द करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा फंड कटौती पूरी तरह से सकारात्मक कार्रवाई की भावना के खिलाफ है। यह उन वंचित तबके के छात्रों के खिलाफ है जो टीआईएसएस जैसे संस्थान में अपना अध्ययन करना चाहते हैं।

 

इन नीतियों के वजह से 500 से अधिक छात्र अपनी डिग्री के विभिन्न स्तरों में प्रभावित हो रहे हैं। ओबीसी श्रेणी के छात्रों के नामांकन पहले ही अनुमानित 9 प्रतिशत कम कर दिये गये हैं। वहीँ अब एससी अथवा अनुसूचित जाति के छात्र को बाहर जाने पर मजबूर कर दिया गया है।

 

टीआईएसएस विश्व स्तर का एक संस्थान बनने के अपने रास्ते पर है और यहां सामाजिक श्रेणी को ऐसे महत्वपूर्ण समय के साथ अनावश्यक किया जा रहा है। इस मामले में छात्र भी विभिन्न मंत्रालयों जैसे कि सामाजिक कल्याण मंत्रालय, आदिवासी मामलों के मंत्रालय से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनको झूठी उम्मीदों और खाली वादों के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। इन सब के मद्देनजर विद्यार्थियों के पास कोई और रास्ता नहीं बचा है, जिस वजह से वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं।

 

छात्रों ने टीआईएसएस मुख्य द्वार पर दो दिनों से अपना कब्जा बनाया हुआ है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होगी वह हड़ताल बंद नहीं करेंगे। वहीं वह सभी छात्रों सेे हड़ताल में शामिल होने और संघर्ष को तेज करने के लिए अनुरोध कर रहे हैं। वह मीडिया के जरिये अनुरोध कर रहे हैं कि वे टीआईएसएस मेन गेट पर आएं और उच्च अधिकारियों तक छात्रों की आवाज पहुंचाने में सहायता करें। उनका कहना है कि संकाय को विरोध स्थल पर आना चाहिए और समर्थन देना चाहिए। वह मुम्बई के अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों से भी अपील कर रहे हैं, जोकि इसी तरह के मुद्दों का सामना कर रहे हैं, वह आगे आकर अपना समर्थन दें।