निशाल-नीरव मोदी घोटाले में सामने आ सकते हैं पीएनबी प्रबंधन के कुछ शीर्ष नाम

आईएनएन भारत डेस्क
बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटाले से दक्षिण मुंबई में रिजर्व बैंक और मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के सटे इलाके में स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा से तार जुड़ रहे हैं।

पीएनबी इस शाखा के कर्मचारियों की मदद से हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने 11,400 करोड़ रुपए के महाघोटाले को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि बैंक के एक पूर्व अधिकारी और बाद में उसके एक जूनियर कर्मचारी ने इस गड़बड़झाले में नीरव मोदी की मदद की थी। परंतु सवाल यह उठता है कि क्या इतने बड़े घोटाले को शाखा स्तर का एक प्रबंधक और उसका जुनियर अकेले ही अंजाम दे सकता है अथवा इस घोटाले की कड़िया उच्च प्रबंधन तक भी जुड़ी हुई हैं।

देश के एक बड़े अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर के अनुसार सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि नीरव की टीम के पास पीएनबी के स्विफ्ट सिस्टम का पासवर्ड था, जो लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के लिए जरूरी है। नीरव के लोग बैंक अधिकारी के तौर पर अवैध तरीके से स्विफ्ट सिस्टम में लॉग इन करते थे।

कहा जा रहा है कि बैंक ने आगाह किए जाने के बाद भी इस गड़बड़झाले की ओर ध्यान नहीं दिया और आखिर वह कौन से उच्चाधिकारी थे, जो जानबूझकर लगातार इस सारे गड़बड़झाले को नजर अंदाज किये जा रहे थे।

बैंक अब यह कह रहा है कि वो पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दोनों ने इसे कैसे अंजाम दिया और इतने समय तक इसका पता किसी को कैसे नहीं चला। कुछ समाचार एजेंसियों ने बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा है कि इस पूरे मामले पर शीर्ष अधिकारियों ने ध्यान नही नही दिया और यह आपरेटिंग सिस्टम की गलती है। परंतु सवाल यह है कि बैंक में इस प्रकार के बड़े लोन को अप्रूव करने के लिए विभिन्न अधिकारियों की लोन सीमा तय है और एक शाखा प्रबंधक अथवा एक जुनियर स्तर का प्रबंधन से जुड़ा कर्मचारी किसी भी सूरत में इतनी बड़ी रकम के एलओयू को अप्रूव नही कर सकता है।

पूरा मामला खुलने के बाद स्विफ्ट इंटरबैंक मैसेजिंग सिस्टम और अधूरे लेजर इंट्री में कथित धोखाधड़ी कैसे हुई, इस बारे में लगातार खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भी बैंक को 10 दिन का समय देकर पूछा है कि वह बताये कि इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए कौन कौन अधिकारी दोषी हैं।

दरअसल, जिस प्रकार से सबीआई से लेकर सीवीसी और आयकर विभाग और ईडी तक विभिन्न जांच एजेंसिया इस मामले में सक्रिय हो गई हैं, उससे लगता है कि मामला केवल छोटी मछलियों को फंसाकर बच निकल जाने से कहीं आगे निकल चुका है और आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में पीएनबी प्रबंधन के कुछ बड़े नाम सामने आ सकते हैं।