ईरानी राष्ट्रपति रूहानी ने भारतीय जमीन से ही दी मोदी के जिगरी दोस्त को धमकी

आईएनएन भारत डेस्क
नई दिल्लीः ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार 17 फरवरी 2018 को बेहद तल्ख अंदाज में कहा कि उनका देश आखिरी सांस तक उस परमाणु समझौते की शर्तों का पालन करेगा जो कि उसने दुनिया के प्रमुख ताकतवर देशों के साथ किया था। रूहानी ने इसके साथ ही अमेरिका को साफतौर पर धमकी देते हुए यह भी कहा कि अगर यह समझौता टूटा तो अमेरिका को ‘‘पछताना पड़ेगा’’। ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद आई है। ट्रंप ने अपने बयान में समझौते से हटने की धमकी दी थी और परमाणु समझौते की समीक्षा की मांग की थी।

राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि संप्रभु देश के रूप में हम अपनी प्रतिबद्धताओं का हमेशा पालन करते हैं। हम इस समझौते का उल्लंघन नहीं करेंगे और इसमें बने रहेंगे। यह तो अल्लाह का आदेश है। अगर हम कोई समझौता करते हैं तो हम अपनी आखिरी सांस तक उसका पालन करते हैं। भारत यात्रा पर आए रूहानी यहां ईरान की विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर संबोधन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ‘मोलभाव’ का समय अब नहीं रहा और समझौते पर हस्ताक्षर कि बाद इस पर विचार करना ‘हास्यास्पद’ है।

ऑब्सर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि परमाणु समझौते के मुद्दे पर अमेरिका केवल ईरान से ही व्यवहार नहीं कर रहा बल्कि इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी शामिल है जिसने इस समझौते को मंजूरी दी थी। रूहानी ने कहा कि अगर समझौता टूटता तो है तो अमेरिका को पछताना पड़ेगा और अमेरिका के लोग ही इसको लेकर चिंतित होंगे।

ईरान तथा छह देशों अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, चीन व जर्मनी के बीच यह समझौता 2015 में हुआ था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस समझौते को लेकर कुछ आपत्तियां जताई हैं। इस समझौते ‘जेसीपीओए’ के तहत पिछले महीने उन्होंने ईरान के खिलाफ प्रतिबंध उठा लिये लेकिन इसके साथ ही चेतावनी भी दे डाली कि यदि समझौते में मौलिक बदलाव नहीं किये गये तो यह इस तरह का आखिरी कदम होगा। इस बीच भारत और ईरान के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में भारत ने इस समझौते के पूर्ण एवं प्रभावी क्रियान्वयन को समर्थन की प्रतिबद्धता दोहरायी है।