नगर निगम अधिकारियों के बेशर्म भ्रष्टाचार की बदौलत चल रहा है सील किया हुआ बैंक्वेट हाॅल

आईएनएन भारत डेस्कः

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और न्यायपालिका ने दिल्ली में प्रदूषण के गंभीर खतरे को समझते हुए अवैध तरीके से संचालित हो रहे व्यवसायिक संस्थानों को सील करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। परंतु दिल्ली नगर निगम और निगम के अधिकारी भ्रष्टाचार का ऐसा सागर हैं जिनके भ्रष्टाचार पर दुनिया की कोई ताकत लगाम नही लगा सकती है। नगर निगम कागजों पर संपति को सील करती है परंतु वह कभी सील होती नही है। अवैध निर्माण के ऐसे हजारों उदाहरण शहर भर में मिल जायेंगे तो वहीं अवैध व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले ऐसे झठी सीलिंग के कईं उदाहरण भी आपके सामने आ जायेंगे।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के शाहदरा उत्तरी जोन ने पिछले साल 17 जुलाई 2017 को अवैध तरीके से संचालित हो रहे एक बैंक्वेट हाॅल अनूप वाटिका को सील किया था। परंतु हमारे संवाददाता ने हाल ही के दिनों में जब उस बैंक्वेट हाॅल का निरीक्षण किया तो वहां कोई सीलिंग नही थी और धूमधाम से शादी हो रही थी। ध्यान रहे कि उस संपति पर अवैध तरीके से बैंक्वेट हाॅल संचालित किये जाने के कारण ही इस संपति को सील किया गया था।

11 जुलाई 2017 को जस्टिस इंद्रमीत कौर की कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान नगर निगम की तरफ  से पेश होने वाले निगम के वकील श्री अजय अरोड़ा ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि उक्त संपति अनूप सिंह वाटिका को क्लोजर नोटिस दे दिया गया है और उस संपति पर आगे से ऐसी कोई सामाजिक गतिविधि संचालित नही की जायेगी। इससे पहले 6 जुलाई 2017 को नगर निगम ने उक्त बैंक्वेट हाॅल को बंद करने का नोटिस दे दिया था और उसके बाद 17 जुलाई को बाकायदा इस बैंक्वेट हाॅल को सील कर दिया गया था।

परंतु हाल ही में इस बैंक्वेट हाॅल में धूमधाम से होती हुई l शादी को देखकर कहा जा सकता है कि यह सब माननीय कोर्ट की आखों में धूल झौंकने की कवायद ही थी और कुछ नही। क्योंकि उस बैंक्वेट हाल के आसपास के लोगों का कहना है कि यहां पर लगातार और निर्बाध तरीके ये कार्यक्रम आयोजित होते हैं। केवल इस जगह का नाम बदल दिया गया है। पहले यह चै. अनूप सिंह वाटिका थी और अब यह अनूप भवन बन चुका है। इसे कहते हैं न्यायपालिका की आंखों में धूल झौंकना।

इसके अलावा एक आरटीआई के जवाब में नगर निगम ने माना है कि इस इलाके में लगभग 15 ऐसे ही बैंक्वेट हाॅल अवैध तरीके से बगैर लाइसेंस के चल रहे हैं। परंतु जब उन पर कार्रवाई के लिए कहा गया तो तमाम तरह की रूकावटों का हवाला उप स्वास्थ अधिकारी देने लगे।

वास्तव में इस पूरे प्रकरण के लिए और इस संपति को सील होने के लिए अथवा नही होने के लिए उप स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. हाण्ड़ा जवाबदेह हैं। और यह वही डाॅ. हाण्ड़ा हैं जिनकी इस पद पर नियुक्ति के बाद उनके भ्रष्टाचार की शिकायते उनके अधीनस्थ स्टाॅफ ने निगमायुक्त को कर दी थी और इस संदर्भ में हिंदी के कुछ राष्ट्रीय समाचार पत्रों में खबर सुर्खियों में रही थी। परंतु कुछ समय बाद उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद यह मामला ठण्ड़ा पड गया और सालों गुजर जाने के बाद भी डाॅ. हाण्ड़ा अपने पद पर कायम हैं। असल में यही देश की राजधानी का नगर निगम है सर से पैर तक भ्रष्टाचार में डूबा हुआ और शहर के प्रदूषण को बर्बाद करने में एकजुट होकर लगा हुआ। इसके सामने ग्रीन ट्रिब्यूनल से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सभी बेमानी हैं, बेकार हैं।