वेबर शहीद मेला का समापन शहीदों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देकर किया गया

आईएनएन भारत डेस्क:

लखनऊ। मैनपुरी के बेवर में पूरा जिला शहीद-ए-वतन मात्रवेदी के कमांडर-इन-चीफ गेंदा लाल दीक्षित और मात्रवेदी के क्रांतिकारियों को याद करने उमडा है। गौतलब है कि मात्रवेदी एक मात्र स्वतंत्रता संग्राम का गुप्त सगठन था, जो गुरिल्ला तरीके से अंग्रेजो के दमन का बदला लेता था। वेबर शहीद मेला का समापन शहीदों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देकर किया गया।

देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी सगठन मात्रवेदी पर 19 दिन के मेले के समापन के अवसर पर युवा पत्रकार शाह आलम के ज़रिये एक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक मात्रवेदी के बारे में पहला लिखित दस्तावेज़ हैं। समापन के मौके पर अशफाकुल्लाह खान यूथ ब्रिगेड के सदस्य व नेता अमीक जामेई, जो समापन के दिन मेहमान थे, उनके हाथो इस पुस्तक का विमोचन हुआ। जामई ने कहा की बेवर की धरती ने उत्तर प्रदेश और देश को 19 दिन के मेले के आयोजन से बताया है कि सरकारे भले ही हमारे शहीदों के नाम इतिहास से मिटाकर फर्जी नायको को स्थापित करना चाहती है। लेकिन अवाम ने बताया है कि वह न शहीदों को न शहादत को भूलने का निश्चय किया है।

अशफाकुल्लाह खान यूथ ब्रिगेड के सदस्य व नेता अमीक जामेई ने कहा जब हम शहादत को याद करते है। तब हम उनकी आत्मा जो भारत के संविधान में निहित है। उसकी बात करते है। शहीदों को याद करने का मतलब, माला चढ़ाना नहीं है। जब हम उन्हें, आज याद करते हैं, तो उनके सपनो के भारत, सबके लिए समानता, बन्धुत्व, सामाजिक न्याय है, उसे याद करते है। अमर शहीदों का बलिदान आज जाया जा रहा है।जब हम तिरंगे के नाम पर एक ही देश के लोग निर्दोष युवाओ को नफरत का शिकार बना कर, हत्याए कर, अपने ही देशप्रेमी नागरिको पर शक कर, उनपर हमला करते है, यह देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों का सपना नहीं था। 

स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण त्रिपाठी, जो भाकपा की उत्तर प्रदेश की इकाई के सचिव भी रहे है, उन्होंने इंकलाबी श्रद्धांजली देने पहुंचे। जामेई ने कहा की कोमरेड जगदीश ने 47 साल पहले इस मेले की शुरुआत की जो नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती से शुरु होकर 10 फरवरी तक चलता है यह सन्देश है कि बेवर की धरती के शहीद ए वतन गेंदालाल दीक्षित और कोमरेड जगदीश पैदा होते रहेंगे और हम नागरिक शहीद वतन के सपनो के भारत के लिए लड़ेंगे, अमीक ने कहा की वह राज त्रिपाठी और शाहआलम जी के कृतज्ञ है। जो आज हमारे देश में अशफाक और बिस्मिल की विरासत है, मै उत्तर प्रदेश के युवाओ को अपील करता हूँ कि इस मेले के क्रम को हम उत्तर प्रदेश का हर जिले में ले जाए।