JNU में NSUI छात्रों को पकौड़ा बनाने पर 20 हज़ार का जुर्माना और निष्कासन का नोटिस

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा दिया गया व्यक्तव्य कि “पकोड़े बनाना भी एक रोजगार है”। उसके ठीक बाद भरतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी राज्यसभा में अपने पहले भाषण में इस पर सहमति जताई और कहा कि “बेरोजगारी से पकौड़ा बेचना बेहतर हैं”। उसके दो दिन बाद उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने भी नीति आयोग के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के पकौड़े बेचने वाली बात का समर्थन किया।

बता दें कि जैसे ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने केंद्र सरकार द्वारा शिक्षित बेरोजगारों का मज़ाक उड़ाए जाने के जबाब में जब पकौड़ा बनाकर अपना विरोध दर्ज किया तब उन पर बीस हज़ार रुपये (Rs. 20,000/-)  का जुर्माना और छात्रावास से स्थान्तरण व छात्रावास से बाहर करने का नोटिस दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक जिन चार छात्रों पर ये जुर्माना लगाया है, उनमें मनीष मीना, विकास यादव, मुकेश गोटड और अलीमुद्दीन शामिल हैं। ये चारों छात्र एक ही संगठन एनएसयूआई-जेएनयू ईकाई के छात्र है।

ज्ञात हो कि ये छात्र पिछले छः दिनों से सड़क पर अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे है। छात्र संगठन एनएसयूआई-जेएनयू ने पिछले दिन पकौड़ा का स्टॉल लगाकर पकौड़ा बेचा था। एनएसयूआई-जेएनयू के पदाधिकारियों का कहना था कि वर्तमान सरकार 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। अब कह रही है कि पकौड़ा बेचना भी रोजगार हैं। पढ़-लिख कर जब पकौड़े ही बेचना है तो अभी से ही पकौड़ा बेचना शुरू कर देते हैं।

एनएसयूआई-जेएनयू इकाई के पदाधिकारी ने कहा कि जेएनयू कुलपति द्वारा सामाजिक न्याय की आवाज को लगातार दबाई जा रही है। जिन छात्रों को सजा दी गई हैं, उन छात्रों में मनीष आदिवासी वर्ग से आते है, विकास पिछड़े, मुकेश दलित और अलीमुद्दीन अल्पसंख्यक वर्ग से आते है। एनएसयूआई-जेएनयू इकाई के उपाध्यक्ष मनीष मीणा ने बताया कि अब हमारे लिए कुछ बचा नहीं है। हमारे लोकतान्त्रिक अधिकारों पर हमला हो रहा है। अब हम “करो या मरो” का नारा देकर सड़क पर उतरेंगे।