गुजरात पुलिस ने क़ानून की उड़ाई धज्जियाँ

आईएनएन भारत डेस्क:
नर्मदा (गुजरात): कानून के रखवाले पुलिस ही कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। राजपीपला पुलिस आदिवासियों की जाति देखकर कार्यवाही कर रही हैं। राजपीपला पुलिस के टाउन PI ने आदिवासी जाति के रिक्शा ड्राईवर  को पहले धमकाया फिर  पैर पकडने पर मजबूर किया। बाद में उस आदिवासी ड्राईवर  को लात मारकर पुलिस वैन वान में बैठाया। आदिवासी डाईवर को जातिसूचक गाली देते हुए राजपीपला पी आई ने मारपीट की।

कानून सबके लिए बारबार हैं। इस मामले में प्रफुल वसावा ने कहा कि अगर 7 दिनों के अंदर इस आरोपी पुलिस के खिलाफ़ कार्यवाही नहीं होती है, तो आदिवासी समाज न्याय के लिए राजपीपला की सडकों पर उतरेंगा। अगर रिक्शा चालक कोई दरबार – पटेल – बनिया – ब्राह्मण होता तो क्या राजपीपला पुलिस इस तरह लात मारकर पुलिस बैठाती?… नहीं ना। तो फिर आदिवासी आरक्षित जिले नर्मदा में आदिवासीओ के साथ पशुओं जैसा व्यवहार क्यों कर रही है राजपीपला पुलिस? पुरे नर्मदा जिला को भारतीय संविधान में आदिवासीओ के लिए आरक्षित जिला घोषित किया हैं। भारतीय संविधान की अनुसूची 5 के अनुच्छेद 244(1) पूरे नर्मदा जिला में लागू होने के बाद भी, गुजरात की भाजपा सरकार गैर-आदिवासी पुलिस अधिकारी की, आदिवासी आरक्षित जिलों में, पोस्टिंग करके आदिवासीओ की आवाज दबा रही है। यह कब तक चलेगा? आदिवासी कब जागेगा और अपना अधिकार मांगेगा। आदिवासियों को उसके अधिकार से कब तक दूर रखा जाएगा। आदिवासी समाज ऐसे जातिगत भेदभावपूर्ण व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारी के विरोध में सड़कों पर उतरेगा। मैं ऐसे पुलिस अधिकारी को तत्काल सस्पेंड कर , आदिवासी युवक के साथ पशुओं जैसा व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ़ कड़ी कार्यवाही करने की मांग करता हूँ।