बीसीसीआई के अभिजात्य भेदभाव से क्रिकेट के खेल में पिछडता बिहार

Byअमित कुमार
विश्व कप अंडर 19 में भारतीय टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले, समस्तीपुर के अनुकूल राय को बहुत बहुत बधाई, बिहार के कई प्रतिभावान खिलाडी जिन्होंने अपने संघर्षो की बदौलत भारतीय टीम में जगह बनाई। बीसीसीआई के भेदभावपूर्ण रवैये के कारण बिहार में क्रिकेट के लिए उचित माहौल नहीं बन पाया, बिहार में क्रिकेट के विकास के लिए लालू जी ने बहुत प्रयास किया था, भले अभिजात्य वर्ग मीडिया इसको नहीं बोले लेकिन जानने वाले लालू जी की भूमिका को भलीभांति जानते हैं। बिहार में अभी तक जितने भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच हुए वो केवल लालू जी कार्यकाल में ही हुए थे। उसके बाद बिहार में कोई भी अंतर्राष्ट्रीय मैच का आयोजन नहीं हुआ है, अविभाजित बिहार में दो अंतर्राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम थे, जमशेदपुर और पटना, जमेशदपुर में 1993 से लेकर 2000 तक चार अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच हुए। पटना में अभी तक दो अंतर्राष्ट्रीय मैच हुए हैंl

 

पहला 1993 और दूसरा और अंतिम 1996 का विल्स वल्र्ड कप मैच। उसके बाद से अभी तक बिहार में कोई अंतर्राष्ट्रीय मैच का आयोजन नहीं हुआ है। 1996 में जिम्बाबवे और केन्या बीच खेले गए विश्व कप मैच का गवाह मैं खुद रहा हूं। आज भी मुझे याद है, उस दौरान मैं स्कूल में पढता था, क्रिकेट खेलने और देखने का बहुत शौक था। घर से स्कूल जाने के रास्ते में यह स्टेडियम पड़ता है, छात्रों को रियायती दर पर टिकट की व्यवस्था की गयी थी। घर से पैसे लेकर तीस रूपये का टिकट लिया, अभी तक उस टिकट को सुरक्षित रखा है।

स्टेडियम को बहुत ही भव्य तरीके से सजाया गया था, नया जेवीजी पवेलियन, इलेक्ट्रॉनिक स्कोर बोर्ड बनाया गया खासतौर पर विश्व कप मैच के लिए। मैच शुरू हुआ तब उस समय के लोकप्रिय मुख्यमंत्री लालू जी भी स्टेडियम में पहुंच चुके थे, वो जैसे ही खड़े होकर दर्शको को हाथ हिलाकर अभिवादन करते पूरा स्टेडियम खड़े होकर आवाज लगाकर लालू जी का स्वागत करता। मैच के दौरान बारिश होने लगी, पिच गीली हो गयी, फिर लालू जी के निर्देश पर हेलीकॉप्टर मंगाया गया, मैदान को सुखाया गया, दर्शको ने इसका भी आनंद लिया, मैं भी हेलीकॉप्टर को इतने नजदीक से पहली बार ही देख रहा था, लालू जी कभी केन्या और जिम्बाबवे के खिलाड़यों को समझाते, फिल्ड की तरफ इशारा करते हुए कुछ दिखाते, तो कभी अधिकारियो को निर्देश देते, दर्शको का ध्यान मैच के साथ साथ लालू जी की सक्रियता पर भी था, बहुत ही रोचक दृश्य था, खैर मैच अगले दिन पूरा हुआ, बहुत दुःख होता है अभी उस स्टेडियम को देखकर, भाजपा और सुशासन बाबू की सरकार ने तो उसको मेन्टेन तक नहीं कर पायी, अंतर्राष्ट्रीय मैच तो बहुत दूर की बात है। इनके मीडिया निर्मित विकास की पोल अब खुल रही है।

-अमित कुमार, शोध छात्र, जवाहरलाल नेहरु विश्विद्याल