सीपीएम के फैसले से आईसीयू में पहुंचा फासीवादी हमले का विकल्प

अरूण महेश्वरी

जनवादी केंद्रीयतावाद का नमूना
पार्टी पर कब्जे के जनवादी केंद्रीयतावादी तत्व के प्रयोग में प्रकाश करात और उनका गुट कितना माहिर है, इसका एक और बड़ा नमूना हाल की केंद्रीय कमेटी की बैठक में कोलकाता में देखने को मिला ।
‘आनंदबाजार पत्रिका’ की खबर के अनुसार केरल से सीआईटीयू के सभापति पी के गुरुदासन को उस अवस्था में अर्नाकुलम से कोलकाता लाया गया था जब वे वहाँ संगीन अवस्था में आईसीयू में भर्ती थे। कोलकाता में भी उन्हें एक नर्सिंग होम के आईसीयू में ही रखा गया। दो दिन तक बहस के समय तक वे आईसीयू में ही पड़े रहे। अंतिम दिन जब वोटिंग का समय आया, केरल के लोग नर्सिंग होम में मुचलका दे कर उन्हें ऐन मतदान के समय में ले आए और मतदान के बाद तत्काल फिर नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया गया।
ऐसे काम करता है जनवादी केंद्रीयतावाद का सिद्धांत। उनके साथी क्रांतिकारी इसे बहस के लिये तैयार किये गये एक मसौदे के प्रति जीवन की बिना परवाह किये महान क्रांतिकारी निष्ठा का एक अनुकरणीय उदाहरण भी कह सकते हैं।

सीपीएम की केंद्रीय कमेटी का विचार-विमर्श
इसमें जनवादी केंद्रीयतावाद की ऐसी महत्ता स्थापित हुई जिसमें सिक्का उछाल कर नहीं, बल्कि तीन दिन की एक थका देने वाली सारहीन बहस के बाद मतदान से ऐसा नीतिगत प्रस्ताव पारित किया गया जिसका भविष्य की नीतियों में वास्तव में दो कौड़ी का मूल्य नहीं होगा । आगे पार्टी कांग्रेस में भी इन्हीं बातों को पीटा जायेगा ।

सीपीएम में मचा भूचाल

अखबारों की बातों को सच माने तो सीताराम येचुरी को पार्टी के महासचिव पद से हटा कर सीपीआई (एम) पर अपना पूर्ण वर्चस्व कायम करने के लिये आतुर प्रकाश करात गुट के कथित बहुमतवादियों ने केंद्रीय कमेटी की बैठक के तीन दिनों में से अब तक दो दिन सिर्फ एक जिद पर गुजार दिये हैं कि पार्टी कांग्रेस के लिये पेश किये जाने वाले दस्तावेज में यह बात साफ शब्दों में लिखी होनी चाहिए कि कांग्रेस पार्टी के साथ पार्टी का किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं होगा। मजे की बात यह है कि यह माँग तब की जा रही है, जब दोनों गुट ही मोदी और बीजेपी को आज के काल में जनता का सबसे बड़ा शत्रु मान रहे हैं।

पार्टी की कार्यनीति के बारे में एक ऐसा जिद्दी और अटल रवैया शायद दुनिया में कहीं भी किसी ने कहीं नहीं देखा होगा। जरूरत पड़ने पर बड़े हितों के लिये दुनिया के बड़े से बड़े दुश्मन से भी हाथ मिलाना ही राजनीति और कूटनीति का एक ध्रुव सत्य माना गया है। कथित बहुमतवादियों की यह अस्वाभाविक जिद अकेली इस बात का प्रमाण लगती है कि इसके पीछे के इरादे सैद्धांतिक कत्तई नहीं हैं। ये शुद्ध रूप से गुटबाजी से प्रेरित, निजी हैं।

इसीलिये आज के ‘टेलिग्राफ’ के अनुसार, वोटिंग के बूते अन्य विचारों को मात देने के अभ्यस्त इस गुट ने इस बार भी विचारों को नहीं, अपने संख्याबल को ही अपनी शक्ति बनाने का निर्णय लिया है। इसकी तैयारी के लिये ये केरल से बुरी तरह से बीमार ऐसे सदस्य को भी केंद्रीय कमेटी की बैठक में ले आये हैं जो बहस में हिस्सा लेने की अवस्था में नहीं है, लेकिन मतदान में जरूर हिस्सा लेंगे।

गुटबाजी का यह घिनौना रूप भारतीय वामपंथ के इतिहास के उस शर्मनाक अध्याय की याद दिलाने लगता है, जब पार्टी के अध्यक्ष एस ए डांगे ने संयुक्त पार्टी के अंदर के अपने विरोधियों को चीन का दलाल बता कर सन् ‘62 के चीन के युद्ध के वक्त गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा के जरिये उनमें से कइयों को सालों तक जेल में बंद करवा दिया था। पार्टी में ऐसी गुटबाजी एक शुद्ध स्वार्थपूर्ण और शरारतपूर्ण खेल के अतिरिक्त और कुछ नहीं होती है।

हम यह दावे के साथ कह सकते हैं कि जिस बहुमतवादी गुट ने आज कांग्रेस से कोई समझौता न करके चलने का झूठा सैद्धांतिक प्रपंच रचा है, वही पार्टी के सचिव पद से सीताराम को हटा कर अपना पूर्ण प्रभुत्व कायम करने के उपरांत वह सब कुछ खुल कर करेगा, जिसके विरुद्ध लड़ाई का वह अभी स्वाँग भर रहा है। और तब अचानक ही परिस्थिति में आ गये बदलाव की दलील देने में इन्हें कोई हिचक नहीं होगी।

इसे नहीं भूलना चाहिए कि प्रकाश करात के नेतृत्व के काल में ही यूपीए-1 में सीपीआई (एम) शामिल हुई थी। बहरहाल, आज की खबरों के अनुसार, आगामी पार्टी कांग्रेस के लिये पार्टी सदस्यों के विचार के लिये दो प्रस्ताव पेश किया जाना लगभग तय है, यदि इसे किसी और तरीके से अटकाया नहीं जाता है तो। यह सीपीआई(एम) में सीधी दरार के लक्षण हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके मूल में कोई सिद्धांत नहीं, पार्टी के ढाँचे और संसाधनों पर कब्जा जमाने का लालच ही मुख्य रूप से काम कर रहा है, यह इसका सबसे दुखद पहलू है।

(यह आलेख अरुण माहेश्वरी जी की वाॅल से ली गई उनकी टिप्पणियों पर आधारित है और अरूण माहेश्वरी वरिष्ठ लेखक और जाने माने वामपंथी चिंतक हैं और आजकल कोलकाता में रहते हैं)